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सावधान, ठंड में बढ़ा फ्रास्ट बाइट का खतरा

Sat, 27 Dec 2014 10:01 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, जम्मू
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कड़ाके की सर्दी के बीच कोहरा शरीर के बाहरी अंगों को नुकसान पहुंचा सकता है। चिल्ले कलां के दौरान भारी सर्दी के बीच संभाग के बर्फबारी से प्रभावित कई जिले फ्रास्ट बाइट की चपेट में आते हैं।
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इसमें कोहरा के कारण अधिक ठंड से खून की सप्लाई बाधित होने से बाहरी अंगों में संक्रमण फैलता है। समय पर इलाज न होने पर अंग को कटवाने की नौबत आ जाती है। जिला स्तर पर त्वचा विशेषज्ञों की कमी से ऐसे मरीजों की दिक्कतें बढ़ सकती हैं।


रियासत का एक बड़ा हिस्सा पहाड़ी इलाके पर बसा है। अधिक ठंड के कारण हर साल बड़ी संख्या में लोग फ्रास्ट बाइट का शिकार हो जाते हैं। एसएमजीएस अस्पताल में त्वचा यूनिट के एचओडी डा. देवराज डोगरा के अनुसार कोहरे से शरीर के खुले हिस्सों नाक, कान, हाथों और पैरों की उंगलियां को नुकसान होने की आशंका ज्यादा रहती है।
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तापमान ज्यादा गिरने से ऐसे हिस्सों में ठंड के कारण खून की सप्लाई पूरी तरह से नहीं हो पाती है। ऐसे हिस्सों में सूजन के साथ खारिश बढ़ती है, जिससे जख्म बन जाने अन्य हिस्सों को बचाने के लिए उस हिस्से को काटना पड़ता है। फ्रास्ट बाइट का प्रकोप ज्यादातर पहाड़ी इलाकों में रहता है। इनमें अधिकांश लोग जागरूकता के अभाव में इस समस्या को नजरअंदाज कर देते हैं।

बचाव
कोहरे में खुले हिस्सों को पूरी तरह से ढक कर रखें
खारिश या सूजन होने पर चिकित्सक को तुरंत बताएं
ज्यादा ठंड में दोपहिया वाहनों पर आवाजाही से परहेज करें
बच्चों की सेहत पर ज्यादा ध्यान दें

स्केविस रोग भी कम खतरनाक नहीं
पारा गिरने के साथ चमड़ी रोग स्केविस का खतरा बढ़ गया है। मरीज को शरीर के कई हिस्सों में खारिश होने के साथ यह बीमारी धीरे-धीरे संपर्क में रहने वाले अन्य लोगों को भी चपेट में ले लेती है। रात के समय इसका असर ज्यादा रहता है। एक ही स्थान पर कई लोगों के साथ रहने से यह रोग ज्यादा पनपता है।

पहाड़ी क्षेत्रों के लोग ज्यादा चपेट में आते हैं। इस संक्रमित रोग में उंगलियों के बीच, पेट और टांगों के बीच ज्यादा खारिश होती है। चेहरे, सिर और पीठ पर यह ज्यादा असर नहीं करती है। अमूमन कोई भी व्यक्ति इस खारिश को सर्दी के कारण खुश्क मौसम से जोड़कर देखता है, लेकिन आहिस्ता-आहिस्ता यही खारिश दानों में तब्दील हो जाती है।

चिकित्सा न लेने पर दानों में पस पड़ना शुरू हो जाता है, जो बड़े जख्म का कारण बनता है। यह बीमारी माईट नामक संक्रमण से फैलती है। सर्दियों में स्केविस लोगों की दिनचर्या में कितना असर करती है, यह मौसम के उतार-चढ़ाव पर निर्भर करता है।
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