पर्वतीय इलाकों में मौसम की करवट और बिजली संकट में चोली दामन का साथ है। हल्की सी हवा चले तो बिजली गुल। बारिश हो तो बिजली गुल और बर्फबारी हो जाए, तो बिजली कब आएगी, इसकी कोई समय सीमा नहीं।
कठुआ जिले के सुदूरवर्ती बनी सब डिवीजन का कसबा हो या फिर दूरदराज के गांव, सर्दी का मौसम बिजली आपूर्ति व्यवस्था के लिहाज से बेहद नागवार गुजरता है। इस दफा बर्फबारी का पैमाना सामान्य से बेहद कम रहा है, लेकिन बिजली संकट का दौर शुरू हो गया है।
दो दिन में हुई बारिश और बर्फबारी की वजह से पूरे इलाके की बिजली गुल हो गई। कसबे से सटे इलाकों से लेकर दूरदराज गांवों में बिजली अभी तक नहीं लौटी है। जहां बिजली की बहाली हो भी गई है, वहां कब बिजली संकट वापसी कर जाए, कुछ कहा नहीं जा सकता।
दो दिन की बर्फबारी से सरथल, डंडी गुट्टू, रोलका, दोलका, मंदी धार व सटे इलाकों में बिजली दो दिन से ठप है। दरअसल, पर्वतीय इलाकों में बिजली ढांचा बुरे हाल में है। दशकों पूर्व लकड़ी के बिजली के खंभे लगाए गए थे।
अधिकांश खंभे आज भी लकड़ी के हैं, उन्हें बदला नहीं गया है। बिजली के तार इस कदर जर्जर हैं कि कायदे से उन्हें बदलने के सिवाए दूसरा कोई चारा नहीं है। बिजली विभाग जर्जर तारों, पुराने खंभों के सहारे ही बिजली की आपूर्ति करवा रहा है।
विभाग के ही एक उच्च अधिकारी बताते हैं कि बिजली ढांचे को बदलने के लिए काई दफा प्रस्ताव भेजा गया है। लेकिन न तो जरूरत के अनुसार खंभे मिलते हैं और ना ही पुरानी हो चुके तार ही बदले जाते हैं।
नतीजतन बिजली को जैसे-तैसे अस्थाई इंतजामों से चलाया जाता है। बर्फबारी की वजह से चूंकि जर्जर बिजली ढांचे पर खासी मार पड़ती है। यही वजह है कि बिजली बहाल करने में कई दफा तो हफ्तों से लेकर महीनों का वक्त भी लग जाता है।