पाकिस्तान के कब्जे वाले बालाकोट में 24घंटे बिजली की जगमगाहट रहती है। जबकि पुंछ के बालाकोट में बिजली तो दूर आज तक गांव में पूरे खंबे भी नहीं लग पाए हैं। जिसके कारण यहां हरे पेड़ों के साथ बांधी गई बिजली की तारें जरा सी हवा चलने के बाद कई दिनों तक बंद रहती है।
पेड़ों के साथ बंधी बिजली की तारों से बरसात के दिनों में करंट लगने से हर बार दर्जनों पशु मारे जाते हैं। मेंढर तहसील के भारत पाक नियंत्रण रेखा पर स्थित बालाकोट सेक्टर के गांव खनेतर निवासी फैयाज अहमद खान, मोहम्मद फारूक, अलताफ हुसैन ने बताया वैसे तो क्षेत्र में आए दिन होने वाली गोलाबारी आम लोगों को कई प्रकार की समस्याएं हैं।
सबसे बड़ी समस्या का कारण विद्युत विभाग है। जिसने आज तक गांव में बिजली के नाम पर मात्र खंबे लगाए हैं। पूरे क्षेत्र में हरे भरे पेड़ों के साथ तारें बांध कर बिजली की सप्लाई की जा रही है। जिससे अकसर क्षेत्र में करंट लगने के हादसे पेश आते है।
ग्रामीणों का आरोप है कि गांव में कोई भी विभाग का अधिकारी कभी भी उनकी समस्याओं को देखने भी नहीं आता है। यहां बिजली की सप्लाई व्यवस्था का क्या हाल है। अकसर एक बार बिजली बंद होने के बाद कई दिनों तक बिजली के दर्शन तक नहीं होते हैं।
लोगों को खुद ही तारें सही करनी पड़ती हैं। अकसर क्षेत्र अंधेरे में डूबा रहता है। वहीं, गांव के बुजुर्ग नंबर दार फारूक खान का कहना ह ैकि बालाकोट का आधा हिस्सा पाकिस्तान के कब्जे में है। वहां पर हर समय बिजली होती है।
क्षेत्र में आने वाले नेताओं ,मंत्रियों और प्रशासनिक अधिकारियों से हर बार एक ही मांग की है कि गांव में बिजली के खंबे लगवा कर पेड़ों से बंधी तारों से होने वाले हादसों से निजात दिलाएं। सिवा आश्वासनों के कुछ नहीं मिला है।