दीवारों पर अब दरारें नजर आती हैं। हर दरार पर एक इश्तेहार है। बिजली के खंभे घरों को रोशन करने में शायद ही काम आए हों, लेकिन, अब बैनर टंगाने के काम आ रहे हैं। सियासत दानों ने चिनार को भी अपने प्रचार में इस्तेमाल कर लिया है। प्रथम चरण के चुनाव में प्रचार की अंतिम घड़ी तक चुनावबाज नेताओं ने जी भर कर दम लगाया। सैलाब की मार से कराह रहे लोग अब इश्तेहार बांचने में मशगूल हैं।
कहते हैं कि वर्तमान की बुनियाद हिलती है तो हर शख्स और संस्था अतीत में झांकती नजर आती है। नेशनल कांफ्रेंस भी अब अतीत के गौरव को भुनाने की कोशिश में जुटी है। इसलिए शेख अब्दुल्ला की तस्वीरों का इस्तेमाल हो रहा है। नेकां के चुनावी पोस्टरों में पहले शेख अब्दुल्ला नजर आते हैं और बाद में फारूक और उमर अब्दुल्ला।
नेकां के लिए प्रथम चरण का चुनाव चुनौती है। इस चरण की अधिकांश सीटों पर नेकां और कांग्रेस का वर्चस्व रहा है। इस बार एक तरफ पीडीपी की चुनौती है तो दूसरी तरफ भाजपा ने कश्मीर घाटी से लेकर चिनाब वेली तक अपनी मौजूदगी का अहसास बड़ी शिद्दत से कराया है।