जम्मू कश्मीर में विधानसभा चुनाव की संभावनाओं को तलाशने के लिए चुनाव आयोग द्वारा नियुक्त तीनों विशेष पर्यवेक्षक शीघ्र ही राज्य का दौरा करेंगे।
मंगलवार को तीनों पर्यवेक्षकों नूर मोहम्मद, विनोद जुत्शी और एएस गिल ने मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा और अन्य आयुक्तों अशोक लवासा और सुशील चंद्र से मुलाकात की।
रविवार को लोकसभा चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के दौरान यह कहा गया था कि सुरक्षा कारणों के चलते जम्मू कश्मीर में विधानसभा और लोकसभा चुनाव एक साथ नहीं हो सकते। चुनाव आयोग के एक बयान में कहा गया है कि मंगलवार को बैठक के दौरान पर्यवेक्षकों से अनुरोध किया गया कि वे जल्द से जल्द राज्य का दौरा कर सकते हैं।
जम्मू कश्मीर विधानसभा भंग होने के कारण चुनाव आयोग को यहां छह माह के अंदर नए सिरे से चुनाव कराने होंगे। छह माह की यह अवधि मई में समाप्त हो रही है।
लोकसभा चुनाव कार्यक्रम की घोषणा से पहले राज्य के दौरे पर गए मुख्य चुनाव आयुक्त ने वहां दो दिन तक सभी राजनीतिक दलों से मुलाकात कर चुनावों को लेकर उनका दृष्टिकोण जाना था। चूंकि अधिकांश दल लोकसभा व विधानसभा चुनाव एक साथ कराने के पक्ष में थे अत: ऐसा माना जा रहा था कि दोनों चुनाव एक साथ ही होंगे। परंतु सुरक्षा कारणों के अलावा पुलवामा हमले के बाद जो तनाव पैदा हुआ उससे स्थितियां विपरीत हो गईं।