कठुआ। बरसात की शुरूआत और खेतों में फसलों की बुआई में तेजी के बीच शुरू हुए पंप सेटों के चलते वोल्टेज ड्रॉप भी बढ़ना शुरू हो गया है। मैदानी इलाकों में तापमान में लगातार हो रही बढ़ोत्तरी और उमस के बीच बढ़े बिजली लोड से अघोषित और घोषित बिजली कटौती भी शुरू हो गई है।
झुलसा देने वाली गर्मी और हवा में नमीं की मात्रा बढ़ने से उमस ने भी लोगों को बेहाल कर दिया है। गर्मी से बचने का हर तरीका फेल होता जा रहा है। घर में एसी, कूलर, पंखे तक काम करना बंद करने लगे हैं। मौसम के तेवर ऐसे हैं कि बिजली तंत्र भी बेहाल होने लगा है। कठुआ ग्रिड पर जहां लोड बढ़ता जा रहा है, वहीं सबसे बुरे हालात हीरानगर ग्रिड के अधीन आने वाले इलाकों के हैं। जहां खेतों में फसलों की बुआई और सिंचाई का काम शुरू होने के साथ ही पंप सेटों के चलने में तेजी आ गई है। कठुआ में 11 केवी लाइन का वोल्टेज ड्रॉप फिलहाल 9.7 तक पहुंचा है, जिसमें पंप सेट चलने के साथ ही और गिरावट आने की संभावना है। उधर, हीरानगर और कठुआ ग्रिड में पीक लोड भी बढ़ने लगा है।
ऐसे में उपकरणों को नुकसान न हो इसके लिए अलग-अलग फीडरों की कटौती कर लोड को कम किया जा रहा है। सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार ग्रिड से की जाने वाली 132 केवी की वोल्टेज सप्लाई में मात्र 120 से 125 केवी लाइन वोल्टेज ही सप्लाई हो पा रही है। इसके बाद आगे ट्रांस्फार्मरों तक पहुंचते यह वोल्टेज ड्राप और भी बढ़ जा रहा है। 66 केवी लाइन में 55 से 59 केवी लाइन वोल्टेज मिल पा रहा है, यानि वर्तमान में हर ट्रांस्फार्मर लो वोल्टेज की समस्या से जूझ रहा है। नतीजतन घर के बिजली उपकरणों ने भी जवाब देना शुरू कर दिया है।
पंप सेटों ने बढ़ाई दिक्कत
बरसात का सीजन शुरू होने के बाद बिजली विभाग के लिए सबसे बड़ी दिक्कत पंप सेट बनते हैं। सिंचाई के लिए प्रयोग में लाए जाने वाले यह पंप सेट इन दिनों सक्रिय हो चुके हैं, जो लाइन वोल्टेज ड्राप और वोल्टेज फ्लक्चुएशन का बड़ा कारण भी बनते हैं। विभाग के अधिकारियों की मानें तो अच्छी बारिश का सिलसिला शुरू होने तक बिजली समस्या जारी रह सकती है। ऐसे में ट्रांस्फार्मर क्षतिग्रस्त होने का खतरा भी बढ़ जाता है।