2जी में ऑनलाइन शिक्षा सिर्फ दिखावा था। अध्यापक यूट्यूब का लिंक व्हाट्स एप पर भेजते थे, लेकिन वह खुल ही नहीं पाता था। गूगल मीट और जूम पर ऑनलाइन क्लासेज के दौरान इंटरनेट की स्पीड कम होने से बफरिंग होती थी और कुछ समझ ही नहीं आता था।
- रजत कुमार, छात्र
कभी-कभी अध्यापक पीडीएफ भेजते थे, वह इतनी मुश्किल होती थी कि उसे समझना बड़ा मुश्किल था। अध्यापक सिर्फ ऑनलाइन क्लास में जुड़ने पर जोर देते थे, जबकि पढ़ाई कुछ नहीं होती थी। हमने खुद ही पढ़ाई कर परीक्षा की तैयारी की थी।
-अमन कुमार, छात्र
मेरी बोर्ड की परीक्षा थी। स्कूल खुलते ही लॉकडाउन शुरू हो गया था। पढ़ाई के लिए न किताबें थीं, न स्कूल। ऑनलाइन पढ़ाई तो सिर्फ नाम की थी। मेरे पास तो मोबाइल ही नहीं था, पापा के मोबाइल पर ऑनलाइन क्लास में जुड़ता था, लेकिन इंटरनेट की स्पीड कम होने से कुछ समझ नहीं आता था। पूरे साल में दो से तीन बार ही ऑनलाइन क्लास लगी होगी।
-सचिन कुमार, छात्र
मेरा स्कूल विंटर जोन में है। हमारी परीक्षा नवंबर में थी, ऐसे में बिना स्कूल के बोर्ड की परीक्षा पास करना मेेरे लिए बड़ी चुनौती थी। ऑनलाइन पढ़ाई तो सिर्फ नाम की थी, जिसमें हमें कुछ पीडीएफ और वीडियो लिंक भेजते थे, जिन्हें समझना बड़ा मुश्किल होता था।
-अंकित कुमार, छात्र
लॉकडाउन जब लंबा चला तो स्कूल शिक्षा निदेशालय जम्मू ने बच्चों को ऑनलाइन पढ़ाने की योजना बनाई। इसमें सबसे पहले व्हाट्सएप ग्रुप, फेसबुक पेज बनाए, जिसमें बच्चों को जोड़ा गया। फिर विषय वार पढ़ाई शुरू की। इस दौरान इंटरनेट बड़ी समस्या थी। 2जी मोबाइल इंटरनेट होने से बच्चों को उस तरह का लाभ नहीं मिला, जैसे मिलना चाहिए था।
- भारत भूषण, शिक्षक
मेरी पोस्टिंग राजोरी जिले के दूरदराज इलाके में है, जहां मोबाइल इंटरनेट की कनेक्टिविटी कम होने के साथ लोगों के पास एंड्रायड मोबाइल भी नहीं है। ऐसे में हमने बच्चों के लिए कम्युनिटी क्लासेज शुरू की थीं, जिसमें काफी काफी संख्या में बच्चे जुड़े। कम्युनिटी क्लासेज का अनुभव हमारे लिए काफी अच्छा रहा। बच्चों के सिलेबस को काफी हद तक पूरा करने की कोशिश की थी।
- हरनाम सिंह जमवाल, शिक्षक राजोरी
किश्तवाड़ जिले के ऐसे गांव में ड्यूटी है जहां इंटरनेट तो दूर फोन पर सिग्नल तक नहीं आता। लॉकडाउन में बच्चों को ऑनलाइन पढ़ाना दूरी की बात थी। हमने कम्यूनिटी क्लासेज से बच्चों को जोड़ा और उन्हें पढ़ाया। इससे बच्चों को काफी लाभ भी मिला, इसी वजह से स्कूल के बच्चों का परिणाम काफी अच्छा रहा।
- संजीत शर्मा, शिक्षक, किश्तवाड़
अचानक सामने आई चुनौती में शहरी क्षेत्रों में ऑनलाइन कक्षाएं और ग्रामीण इलाकों में रेडियो, टीवी और सामुदायिक कक्षाएं चलाई गईं। कुछ खामियां जरूर रहीं लेकिन कुलमिलाकर इसके अच्छे नतीजे सामने आए। शिक्षा विभाग अब ऑनलाइन पढ़ाने के लिहाज से पहले की तुलना में बेहतर स्थिति में है।
- एचआर पखरू, संयुक्त निदेशक, स्कूल शिक्षा विभाग जम्मू