आईआईटी में प्रवेश लेना बड़ी बात पर शानदार परफार्मेंस देना भी कम नहीं
लाडलों को मेडल लेते देख भावुक हुए माता-पिता, बोले-अविस्मरणीय पल
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू।
आईआईटी में प्रवेश लेना तो बड़ी बात है ही, शानदार परफॉर्मेंस कर मेडल हासिल करना भी कम नहीं। आईआईटी जम्मू के जिन होनहारों को उनकी मेहनत के बदले मेडल मिला, उसने उनके चेहरों पर चमक ला दी। उनकी यह खुशी उनके माता-पिता की आंखों से भी झलकी नजर आई। वे बोले-ये अविस्मरणीय पल हैं।
मां-बाप की तरह ईमानदार रहना है
साकिब रशीद वानी एमटेक का इंस्टीट्यूट गोल्ड लेने अपने परिवार के साथ पहुंचे थे। सभी उन्हें पदक लेते देख चहक रहे थे। बकौल साकिब उनके परिवार में कोई इंजीनियर है तो कोई डॉक्टर। मां-बाप दोनों टीचर हैं। इसका असर उन पर भी है। वे कहते हैं कि उन्होंने अपने पिता खुर्शीद अहमद वानी और मां तस्लीमा से ईमानदारी का सबक सीखा है। इसे वे हर क्षेत्र में लागू करेंगे। साकिब को मेडल मिलने पर सभी ने उन्हें गले लगाकर अपनी खुशी जताई।
फिलहाल मां-बाप के साथ, बाकी प्लानिंग बाद में
मूल रूप से जालंधर (पंजाब) के रहने वाले आश्रय गुप्ता ने प्रेसिडेंट्स गोल्ड मेडल हासिल किया तो उनके माता-पिता की आंखें छलक उठीं। जनरल फिजिशियन और आयुर्वेदिक चिकित्सक के रूप में कार्यरत उनके पिता अरविंद और मां श्वेता इस पल को अपलक देखते रहे। उनके साथ झूमते हुए बीटेक कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग के छात्र आश्रय ने बताया कि फिलहाल वे मां-बाप के साथ हैं। अभी बंगलूरू की अपनी कंपनी में जॉब जारी रखेंगे, इसके बाद एमटेक या किसी अन्य कोर्स के बारे में प्लानिंग करेंगे।
मेडल लेते ही किया मां-बाप का शुक्रिया अदा
इंदौर की रहने वाली स्नेहा डायरेक्टर्स गोल्ड मेडल हासिल करने के बाद अपने मां-बाप का शुक्रिया अदा करना नहीं भूलीं। स्नेहा के पिता बृजकिशोर और मां सुनीता भी उसे मेडल के साथ देखकर भावुक नजर आए। डांस और खास तौर पर हिपहॉप में दिलचस्पी रखने वालीं स्नेहा अभी आगे पढ़ाई के मूड में हैं। वे नोएडा में अपनी जॉब के साथ-साथ एमबीए करने के लिए कैट यानी कॉमन एडमिशन टेस्ट के लिए भी तैयारी करेंगी। बीटेक आईआईटी से करना उनका सपना था, जो पूरा हो गया।
पति के सपोर्ट से शादी और पढ़ाई के बीच संतुलन बिठाया
एमएससी केमिस्ट्री का गोल्ड हासिल करने वाली मोनिका ने शादी और पढ़ाई के बीच संतुलन साधकर दिखाया। बेशक यह आसान नहीं था। उनके पति धर्मेंद्र, जो कि उनके बैचमेट भी हैं, मोनिका की उपलब्धि से बेहद खुश नजर आए। मूल रूप से पंजाब के बठिंडा ने अपनी इंटर्नशिप आईआईटी दिल्ली, बंगलूरू आदि जगहों से की। टीचिंग में दिलचस्पी रखने वालीं मोनिका फिलहाल बेशक जॉब में व्यस्त हैं, लेकिन इसके बाद वे रिसर्च पर फोकस करना चाहती हैं। उनके पति उनके प्रतियोगी बल्कि सहयोगी और समर्थक हैं।
काफी सामान खराब किया पर पिता ने कभी नहीं टोका
मूल रूप से कालपी (उत्तर प्रदेश) के रहने वाले संस्कार ने बचपन में अपनी जिज्ञासा के चलते काफी सामान खराब किया, लेकिन उनके पिता सुनील, जो कि एक मुनीम थे, ने अपनी आर्थिक स्थिति ठीक न होने के बावजूद उन्हें कभी कुछ नहीं कहा। संस्कार को बीटेक का इंस्टीट्यूट सिल्वर मेडल मिलते देख वे बेहद भावुक हो गए। संस्कार ने एजुकेशन के जरिए अपने हालात बदलने में कोई कोर-कसर बाकी नहीं रखी। वे आईआईटी में पढ़ना चाहते थे। इसके लिए उन्होंने मैटीरियल इंजीनियरिंग चुना। पिता उनके हर फैसले में साथ होते हैं।