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Jammu News: विशेष बच्चों की पढ़ाई के लिए खास इंतजाम में पड़ोसी राज्यों से आगे जम्मू-कश्मीर

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- प्रदेश के 52 प्रतिशत स्कूलों में मौजूद हैं जरूरी सुविधाएं
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- आर्थिक सहायता, प्रशिक्षित शिक्षक और रिसोर्स रूम से बदली तस्वीर

गौरव रावत

जम्मू। जम्मू कश्मीर ने विशेष जरूरत वाले बच्चों की पढ़ाई के लिए पड़ोसी राज्यों से बेहतर काम किए हैं। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) की ''परख'' रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश के 52 फीसदी स्कूलों में विशेष बच्चों के लिए जरूरी इंतजाम मौजूद हैं। इस मामले में जम्मू कश्मीर ने पड़ोसी राज्य पंजाब, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा और उत्तराखंड को पीछे छोड़ दिया है।



रिपोर्ट के अनुसार, पंजाब के 28 फीसदी, हिमाचल और हरियाणा के 30-30 फीसदी और उत्तराखंड के केवल 20 फीसदी स्कूलों में ही विशेष बच्चों के लिए जरूरी सुविधाएं उपलब्ध हैं। जम्मू कश्मीर के सरकारी स्कूलों में अब रैंप, ब्रेल किट, सुनने वाले यंत्र, विशेष शौचालय और पढ़ाई में सहायक उपकरण आम हो गए हैं। इसके लिए सरकार ने तीन वर्षों में योजनाबद्ध ढंग से कई नई पहलें की हैं।
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188 शिविरों में 18,660 बच्चों को मिले सहायक उपकरण

समग्र शिक्षा योजना के तहत वर्ष 2023 में प्रदेशभर में 188 शिविर आयोजित किए गए, जिनमें 21,000 से अधिक विशेष जरूरत वाले बच्चों की पहचान हुई। इनमें से 18,660 बच्चों को व्हीलचेयर, चलने-फिरने वाले यंत्र, ब्रेल किट और सुनने वाले उपकरण दिए गए। ये शिविर एएलआईएमसीओ और समग्र शिक्षा विभाग के सहयोग से आयोजित हुए। शिक्षा विभाग के अनुसार अब तक चिन्हित 15,000 बच्चों का नामांकन सरकारी और 4,000 का नामांकन निजी स्कूलों में कराया गया है। इससे पहले ये बच्चे सुविधाओं के अभाव में स्कूल नहीं जा पाते थे।




शिक्षकों को मिला विशेष प्रशिक्षण, रिसोर्स रूम भी तैयार

राज्य शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद और जिला शिक्षा संस्थानों ने वर्ष 2023-24 में विशेष शिक्षकों को बड़े स्तर पर प्रशिक्षण दिया। इन प्रशिक्षणों में ब्रेल पद्धति, सुनने की भाषा, समावेशी शिक्षा और व्यवहार सहयोग जैसे विषय शामिल थे। ''निष्ठा'' कार्यक्रम के जरिये भी शिक्षकों को खास प्रशिक्षण दिया गया। वर्ष 2023 में सभी जिलों में 64 से अधिक रिसोर्स रूम स्थापित किए गए, जहां विशेष प्रशिक्षित शिक्षक उन बच्चों को अलग से सहायता देते हैं जो पढ़ाई में पीछे चल रहे होते हैं।



आवागमन से लेकर छात्रवृत्ति तक सीधी सहायता

वर्ष 2022 से सरकार ने विशेष बच्चों और उनके परिवारों को आर्थिक सहायता देना शुरू किया। इसके तहत स्कूल आने-जाने के लिए 2,500 रुपये यात्रा भत्ता, देखभाल के लिए 1,500 रुपये सहयोग भत्ता, दृष्टिहीन बच्चों को पढ़ाई में मदद के लिए 2,000 रुपये रीडर भत्ता और बालिकाओं को 2,000 रुपये छात्रवृत्ति दी जाती है। यह सहायता सीधे अभिभावकों या बच्चों के खाते में भेजी जाती है। इसके अलावा ढांचागत सुविधाओं के लिए समग्र शिक्षा योजना के तहत वर्ष 2022 से 2024 के बीच 10,419 निर्माण कार्यों के लिए 1,477 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई। इनमें से करीब 4,000 कार्य पूरे हो चुके हैं। इनमें विशेष शौचालय, रैंप और कक्षाओं में सुधार शामिल हैं।
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विभाग का प्रयास है कि किसी भी विशेष बच्चे को पढ़ने-लिखने में दिक्कत न हो। इसके लिए काफी काम किए गए हैं, आगे भी काम जारी रहेंगे। लगातार जन जागरूकता फैलाने का काम भी किया जा रहा है।

- भवानी रकवाल, प्रोजेक्ट डायरेक्टर, समग्र शिक्षा अभियान
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