- जम्मू डिवीजन के लिए अकादमिक प्लानर जारी, पढ़ाई से लेकर परीक्षा तक सब पहले से तय
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। शैक्षणिक सत्र 2026-27 में जम्मू डिवीजन के स्कूलों में पढ़ाई का तरीका बदलने वाला है। स्कूल शिक्षा निदेशालय, जम्मू ने नया अकादमिक प्लानर जारी किया है, जिसमें पूरे साल क्या होगा, कब होगा और कैसे होगा सब पहले से तय कर दिया गया है। यह प्लानर नई शिक्षा नीति के तहत तैयार किया गया है, ताकि सभी सरकारी और निजी स्कूलों में पढ़ाई एक जैसे तरीके से हो सके।
अब स्कूलों का सत्र अलग-अलग जोन के हिसाब से शुरू होगा। समर जोन में अप्रैल के पहले हफ्ते से कक्षाएं शुरू होंगी, जबकि विंटर जोन में नवंबर के पहले हफ्ते से पढ़ाई शुरू होगी। पूरे साल में कक्षाओं के स्तर के अनुसार 160 से 220 दिन तक स्कूल खुलेंगे, ताकि पढ़ाई नियमित ढंग से हो सके। स्कूलों के समय भी पहले से तय कर दिए गए हैं। समर जोन में स्कूल सुबह आठ बजे से दोपहर दो बजे तक चलेंगे, जबकि विंटर जोन में सुबह नौ बजे से दोपहर तीन बजे तक कक्षाएं लगेंगी। प्रवेश प्रक्रिया सत्र की शुरुआत में ही पूरी करनी होगी और यदि सीट खाली है तो किसी भी बच्चे को दाखिला देने से मना नहीं किया जा सकेगा। बच्चों की पढ़ाई को और बेहतर बनाने के लिए ऑनलाइन और टीवी के जरिए भी पढ़ाई कराई जाएगी, ताकि बच्चे घर पर भी आसानी से सीख सकें।
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अब रोज पढ़ना होगा, सिर्फ किताबें नहीं, नो बैग डे में सीखेंगे नई चीजें
अब हर स्कूल में बच्चों के लिए रोज 30 मिनट पढ़ना अनिवार्य होगा। इसमें केवल पाठ्यपुस्तकें ही नहीं, बल्कि अखबार और पत्रिकाएं भी शामिल होंगी, ताकि बच्चों की समझ और सोच बेहतर हो सके। कक्षा छह से आठ तक के बच्चों के लिए हर साल 10 दिन नो बैग डे रखे गए हैं। इन दिनों में बच्चे बिना बैग के स्कूल आएंगे और खेल, कला, स्थानीय कौशल और अन्य गतिविधियों के जरिए सीखेंगे। इससे पढ़ाई को आसान और रोचक बनाने की कोशिश की जा रही है। अब पूरे साल की परीक्षा व्यवस्था पहले से तय रहेगी। अलग-अलग समय पर टेस्ट होंगे और बोर्ड व प्री-बोर्ड परीक्षाओं की तारीखें भी पहले से निर्धारित कर दी गई हैं, ताकि बच्चों को तैयारी में आसानी हो सके।
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सिर्फ नंबरों के आधार पर नहीं बनेगा रिपोर्ट कार्ड
अब बच्चों का मूल्यांकन सिर्फ नंबरों के आधार पर नहीं होगा। उनके व्यवहार, गतिविधियों में भागीदारी और कौशल को भी शामिल किया जाएगा। इसके लिए नया होलिस्टिक प्रोग्रेस कार्ड लागू किया जाएगा, जिसमें बच्चे की पूरी प्रगति दिखाई देगी। स्कूलों में मॉर्निंग असेंबली को छोटा और प्रभावी बनाया जाएगा। इसमें योग, प्रेरक बातें और सभी बच्चों की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। साथ ही सालभर खेल, विज्ञान प्रदर्शनी और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।