- बढ़ता तापमान, अनियमित बारिश और कीटों का खतरा बड़ी चुनौती, नई किस्मों पर जोर
- जम्मू विवि में विशेषज्ञ बोले, शोध और नई तकनीक का फायदा सीधे किसानों तक पहुंचे
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। बढ़ता तापमान, अनियमित बारिश और पानी की कमी आने वाले समय में सब्जियों की खेती के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है। ऐसे में जलवायु के अनुकूल नई किस्मों, आधुनिक तकनीक और शोध को खेतों तक पहुंचाना ही पोषण सुरक्षा का सबसे प्रभावी रास्ता होगा। यह बात सोमवार को जम्मू विश्वविद्यालय में आयोजित इनोवटॉक्स व्याख्यान में विशेषज्ञों ने कही।
इंस्टीट्यूशन इनोवेशन काउंसिल और वनस्पति विज्ञान विभाग के संयुक्त आयोजन में एकेडमी ऑफ इंडियन हॉर्टिकल्चर, बेंगलुरु के अध्यक्ष डॉ. सुरिंदर टिक्कू ने कहा कि सब्जियां संतुलित आहार का अहम हिस्सा हैं और कुपोषण से लड़ने में उनकी बड़ी भूमिका है।
बदलते मौसम को देखते हुए अब ऐसी किस्मों और खेती की तकनीकों को अपनाने की जरूरत है, जो कम पानी और प्रतिकूल मौसम में भी बेहतर उत्पादन दे सकें। डॉ. टिक्कू ने आधुनिक पौध प्रजनन, संरक्षित खेती, सटीक कृषि तथा बेहतर पोषक और कीट प्रबंधन पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि शोध का लाभ तभी मिलेगा, जब नई तकनीक और नई किस्में किसानों तक पहुंचें और उनका उपयोग खेतों में हो।
कार्यक्रम की शुरुआत वनस्पति विज्ञान विभागाध्यक्ष प्रो. सुशील वर्मा ने की। उन्होंने जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने के लिए नवाचार आधारित कृषि पर जोर दिया। कार्यक्रम में शिक्षक, शोधार्थी और विभिन्न विभागों के विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया। व्याख्यान के बाद प्रतिभागियों ने विशेषज्ञों से जलवायु के अनुकूल खेती और पोषण सुरक्षा पर चर्चा की।
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