- अप्रैल के बाद लगातार तीन महीने राज्य के जीएसटी संग्रह में नहीं आई तेजी
- फिर भी आईजीएसटी के बंटवारे से सरकार के खाते में ज्यादा पैसा पहुंचा
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। देशभर में कारोबार लगातार रफ्तार पकड़ रहा है। जीएसटी के ताजा आंकड़े भी यही तस्वीर दिखाते हैं। जुलाई में देश का जीएसटी संग्रह रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया लेकिन जम्मू-कश्मीर की स्थिति इससे अलग रही। अप्रैल में अच्छी शुरुआत के बाद राज्य में कारोबार की रफ्तार धीमी पड़ गई। मई, जून और जुलाई में जीएसटी संग्रह में कोई खास बढ़ोतरी नहीं हुई। हालांकि दूसरे राज्यों के साथ होने वाले कारोबार पर लगने वाले आईजीएसटी के बंटवारे से सरकार के खाते में पहले से ज्यादा पैसा आया है।
जुलाई में जम्मू-कश्मीर का घरेलू जीएसटी संग्रह 581 करोड़ रुपये से घटकर 578 करोड़ रुपये रह गया। दूसरी ओर पूरे देश में इसी महीने जीएसटी संग्रह 15.4 प्रतिशत बढ़कर 2.11 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। हालांकि दूसरे राज्यों के साथ होने वाले कारोबार पर लगने वाले आईजीएसटी के बंटवारे से जम्मू-कश्मीर को राहत मिली।
जुलाई में राज्य का अपना एसजीएसटी संग्रह 248 करोड़ रुपये रहा, लेकिन आईजीएसटी का हिस्सा मिलने के बाद सरकार के खाते में कुल 787 करोड़ रुपये पहुंचे। यानी केंद्र से आईजीएसटी के बंटवारे के जरिए 539 करोड़ रुपये मिले। यह पिछले साल के मुकाबले 12 प्रतिशत अधिक है। अप्रैल से जुलाई तक भी आईजीएसटी सेटलमेंट के बाद राज्य के खाते में कुल 3,233 करोड़ रुपये पहुंचे, जो पिछले साल के 2,684 करोड़ रुपये की तुलना में 20 प्रतिशत ज्यादा हैं।
देशभर के बाजार से चाल नहीं मिला पा रहा प्रदेश
केंद्रीय विश्वविद्यालय जम्मू में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर अश्विनी नंदा बताते हैं कि चार महीनों के आंकड़े यही बताते हैं कि राज्य को फिलहाल आईजीएसटी के बंटवारे से राहत मिल रही है लेकिन जम्मू-कश्मीर के अपने बाजार में अभी भी वैसी तेजी नहीं दिख रही, जैसी देश के दूसरे हिस्सों में नजर आ रही है। आने वाले महीनों में अगर पर्यटन, व्यापार, निर्माण गतिविधियां और स्थानीय खरीदारी बढ़ती है तो उसका असर जीएसटी संग्रह पर भी दिखाई देगा।
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चार महीने में जम्मू-कश्मीर का जीएसटी संग्रह
महीना संग्रह (करोड़ रुपये) सालाना बढ़ोतरी
अप्रैल 610 10%
मई 574 -1%
जून 470 -15%
जुलाई 578 0%
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