जम्मू-कश्मीर राज्य पाठ्यचर्या रूपरेखा व आधारभूत चरण तैयार, मंजूरी का इंतजार
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। प्रदेश में प्रारंभिक बचपन देखभाल और शिक्षा (ईसीसीई) की तस्वीर बदलेगी। इसके लिए विस्तृत नियमावली तैयार कर ली गई, जिसे मंजूरी के लिए प्रशासनिक विभाग के साथ नई शिक्षा नीति की कार्यान्वयन समिति को भेजा गया है। मंजूरी मिलने के बाद प्रारंभिक स्तर तक शिक्षा में बड़ा बदलाव आएगा। बच्चों को कैसे, क्या और कौन पढ़ाएगा, इसकी स्पष्टता होगी, जिससे सकारात्मक बदलाव आएगा।
ईसीसीई में प्री-प्राइमरी से कक्षा दो के बच्चे आते हैं। इस स्तर के बच्चों की शिक्षा व देखभाल के लिए एनसीएफ (राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा) तैयार की गई थी। इसी की तर्ज पर जम्मू-कश्मीर राज्य पाठ्यचर्या रूपरेखा-आधारभूत चरण (जेकेएससीएफ-एफएस) को तैयार किया है। इसमें पांच कक्षाएं शामिल की गई हैं। जम्मू-कश्मीर में अभी 2000 से अधिक किंडरगार्डन चल रहे हैं। इनमें बच्चों को क्या सिखाया और पढ़ाया जाएगा, किन गतिविधियों के साथ जोड़ा जाएगा इसको लेकर स्पष्टता नहीं है। इस स्तर पर शिक्षा व देखभाल को लेकर स्पष्टता की जरूरत को देखते हुए जम्मू-कश्मीर स्कूल शिक्षा बोर्ड ने राज्य पाठ्यचर्या रूपरेखा-आधारभूत चरण बनाने का फैसला लिया है। इसमें प्रदेश के साथ अन्य राज्यों के विशेषज्ञों को शामिल किया गया। राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा के आधार पर विभिन्न हितधारकों की ओर से मसौदा तैयार किया जाएगा, जिसे अब दस्तावेज का रूप मिलेगा। एनसीएफ-एफएस के स्थानीय संदर्भीकरण पर काम किया गया है, जो यहां के छात्रों की विशिष्ट आवश्यकताओं के अनुरूप हो।
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प्री- प्राइमरी से कक्षा दो तक पढ़ाने वाले अलग शिक्षक होंगे
राज्य पाठ्यचर्या रूपरेखा-आधारभूत चरण के लागू होने के बाद प्री-प्राइमरी से कक्षा दो तक पढ़ने वाले बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा व देखभाल मिलेगी। अभी इस स्तर तक बच्चों को देखभाल व पढ़ाने के लिए अलग शिक्षक नहीं हैं, लेकिन भविष्य में शिक्षक अलग होंगे। इसके लिए सर्टिफिकेट व डिप्लोमा कोर्स करवाया जाएगा। सर्टिफिकेट कोर्स 12वीं कक्षा से कम तक पढ़े लोग कर सकेंगे, जबकि डिप्लोमा कोर्स 12वीं कक्षा उत्तीर्ण लोग कर सकेंगे। डिप्लोमा व सर्टिफिकेट कोर्स करने वालों की नियुक्तियां होंगी। इससे न सिर्फ छोटे बच्चों को बेहतर शिक्षा व देखभाल मिलेगी, बल्कि युवाओं को रोजगार भी मिलेगा।