शराब और सिगरेट के बाद अब हीरोइन और ब्राउन शूगर ने जगह ले ली है। युवा इस नशे की दलदल में तेजी से धंसते जा रहे हैं। इसमें निडिल और सूंघने के जरिये ड्रग्स को शरीर के भीतर डालने का चलन बढ़ा है। इसकी चपेट में युवकों के साथ युवतियां भी शामिल हैं। शहर और आसपास के पॉश इलाकों के बच्चे ज्यादा प्रभावित हैं। नशे की लत ने उन्हें अपराध की ओर भी धकेला है। ड्रग्स पाने के लिए नशा करने वाले कुछ भी करने को तैयार रहते हैं।
हीरोइन और ब्राउन शूगर को सामूहिक तौर पर निडिल और ड्रग्स को जलाकर सूंघने के माध्यम से ज्यादा लिया जा रहा है। पानी में मिलाकर ड्रग्स को निडिल से नाड़ियों के जरिये शरीर में डाल दिया जाता है, जिससे शारीरिक गतिविधियां सुस्त पड़ जाती हैं और नशा करने वाले को आसपास के वातावरण की कोई परवाह नहीं रहती है। निडिल ड्रग्स से एचआईवी का खतरा बढ़ा है।
इस ड्रग्स की चपेट में 16-25 साल के युवा ज्यादा चपेट में हैं। पहले ये ड्रग्स 3-4 हजार रुपये की कीमत में रोजाना ली जाती है, लेकिन धीरे-धीरे डोज बढ़ने पर इसकी कीमत माह में एक लाख रुपये से ज्यादा पहुंच जाती है। ड्रग्स का आदि हो जाने पर उसे छोड़ने की सूरत में नशा करने वाले की शारीरिक और मानसिक हालत खराब हो जाती है। अमूमन ऐसे लोगों के फेफड़ों में की इंफेक्शन रहती है। डोज न लेने पर शरीर में जबरदस्त दर्द, शरीर का टूटना, नाक और मुंह से पानी चलना, कमजोरी महसूस करना आदि समस्या होती है।