श्रीनगर। नशीली दवाओं की तस्करी को सामाजिक खतरा करार देते हुए श्रीनगर की विशेष न्यायाधीश (एनडीपीएस मामले) की अदालत ने कहा कि दोषसिद्धि नैतिक आक्रोश के बजाय कानूनी सबूतों पर आधारित होनी चाहिए। इसी के साथ अदालत ने 2022 में एक व्यक्ति को नशीले पदार्थों की तस्करी के आरोप से बरी कर दिया, जिस पर पुलिस ने दावा किया था कि उसके पास से 40 बोतल कोरेक्स और 211 स्पास्मो प्रॉक्सीवोन कैप्सूल बरामद किए गए थे। अभियोजन के अनुसार, बुदू बाग, श्रीनगर निवासी ऐजाज अहमद भट, पुत्र बशीर अहमद भट, को 9 जुलाई 2022 को नौपोरा के पास गश्त के दौरान पुलिस ने गिरफ्तार किया था। पुलिस ने बताया कि उसके कब्जे से कोरेक्स की बोतलें, स्पास्मो प्रॉक्सीवोन कैप्सूल, 18,150 रुपये नकद और एक मोबाइल फोन जब्त किया गया।
मामले की सुनवाई के बाद विशेष न्यायाधीश (एनडीपीएस मामले) विनोद कुमार ने भट को बरी कर दिया। अदालत ने कहा कि बरामदगी और फोरेंसिक पुष्टि के अभियोजन के दावों को असुरक्षित सबूतों, नमूने लेने में देरी, गवाहों की अनुपस्थिति और मात्रा में असंगति ने कमजोर कर दिया। अदालत ने जोर दिया कि संविधान का अनुच्छेद 21 निष्पक्ष सुनवाई की गारंटी देता है, जिसमें एनडीपीएस अधिनियम के तहत प्रक्रियात्मक सुरक्षा शामिल है। बचाव पक्ष की जिरह में असुरक्षित सबूत और देरी जैसे उल्लंघन उजागर हुए। संवाद