खेती के लिए बारिश पर निर्भर लाखों हेक्टेयर कृषि भूमि का रबी सीजन सूखे की ओर बढ़ रहा है। हालात खासे चिंताजनक बन गए हैं। यदि जल्द ही बारिश नहीं होती है तो रबी सीजन की मुख्य फसल गेहूं सहित दलहन और तिलहन फसलों का चौपट होना तय माना जा रहा है।
अखनूर से लखनपुर तक हाईवे का ऊपरी ओर स्थित ड्राइलैंड एरिया सबसे ज्यादा प्रभावित चल रहा है। सिंचाई के लिए खेती चूंकि लगभग पूरी तरह से बारिश पर ही निर्भर है। ऐसे में बारिश के बिना फसलों के पौधे मुर्झाने शुरू हो गए हैं।
अधिकारिक आंकड़ों के अनुसार 2.2 मिलियन हेक्टेयर भूमि पर इस बार बारिश का पैमाना सामान्य से लगभग सत्तर फीसदी कम रिकार्ड हुआ है। ड्राइलैंड एरिया में रबी सीजन यानी अक्तूबर से अप्रैल तक के पिछले पच्चीस साल की औसत 232.6 मिलीमीटर बारिश है।
बीस फरवरी तक यह औसत 128 मिलीमीटर बारिश बैठती है, लेकिन फरवरी का दूसरा पखवाड़ा शुरू होने के बावजूद रबी सीजन के हिस्से केवल 55.1 मिलीमीटर बारिश रिकार्ड हुई है। इस लिहाज से रबी सीजन की खेती को बारिश के सीधे-सीधे 70 फीसदी शार्टफाल का सामना करना पड़ रहा है।
ड्राइलैंड एरिया के पिछले पच्चीस साल के रिकार्ड में ऐसा पहली बार हो रहा है, जब लगातार दूसरे वर्ष रबी सीजन को सिंचाई के गंभीर संकट से गुजरना पड़ रहा है।
स्कॉस्ट जम्मू के एडवांस सेंटर फार रेनफेड एग्रीकल्चर के प्रभारी डा. अनिल कुमार शर्मा के अनुसार पिछले पच्चीस वर्ष के अध्ययन के अनुसार हर पांचवें वर्ष सूखे जैसे हालात बन रहे हैं। रबी के वर्तमान सीजन में भी एक तरह से सूखे का संकट शुरू हो गया है।