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क्षतिग्रस्त पाइपों से हो रही है दूषित पानी की आपूर्ति

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अखनूर। कस्बे के कई वार्डों में पेयजल की पाईप कई जगहों पर क्षतिग्रस्त है। ऐसे में लोगों को दूषित पानी की आपूर्ति हो रही है। लोगों ने जल शक्ति विभाग से मांग की है कि स्वच्छ पानी की आपूर्ति की जाए।
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कस्बे के कई वार्डों में करीब चालीस साल पहले पेयजल आपूर्ति के लिए पाइप डाली गई। अब यह कई जगहों पर लीक हो गई है। इससे लोगों के घरों में दूषित पानी की आपूर्ति हो रही है। लोगों ने कहा कि इस बारे में कई बार संबंधित अधिकारियों को अवगत कराया गया, मगर इसके बावजूद पानी साफ नहीं पहुंच रहा।
रवि कुमार ने बताया कि कस्बे में कई जगहों पर पाईप लीक होने पर लोगों के घरों में दूषित पानी की आपूर्ति हो रही है, मगर विभाग कुछ नहीं कर रहा। लोगों में पेट संबंधी बीमारियां बढ़ रही हैं। विजय शर्मा ने बताया पिछले दिनों जल शक्ति विभाग के अधिकारियों से मिल करके पानी का सैंपल भी लिए गए। मगर फिर भी लोगों को पानी की आपूर्ति दूषित हो रही हैं। इस पर सरकार और प्रशासन को चाहिए कि कस्बे में पानी की आपूर्ति की जांच की जाए, और लोगों को पीने का पानी साफ मिल सके।
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पहाड़ी गांव के लोग आज भी प्राकृतिक जलस्रोत के पानी पर निर्भर
संवाद न्यूज एजेंसी
सांबा। जिले के पहाड़ी गांवों के ग्रामीण आज भी प्राकृतिक जलस्रोत के पानी पर मजबूर हैं। ग्रामीणों के अनुसार उन्हें पेयजल की आपूर्ति नहीं किए जाने से वह कुओं, बावली व नदी नालों के पानी पर ही निर्भर रहते हैं।
जिले के पहाड़ी पंचायत गौरण के मोड़ा समोठा के पूर्व पंच जगदीश सिंह, महिला गीता देवी, पुरुषोत्तम आदि ने बताया कि यहां के आसपास के गांव के लोग आज भी कुओं, बावली व नदी नालों का पानी पीने को मजबूर हैं। उन्होंने बताया कि उनके बुजुर्ग भी इन्हीं स्रोतों से पानी पीते आ रहे हैं। उन्हें भी पीना पड़ रहा है। उनके अनुसार कि गर्मी के दिनों में कुदरती स्रोत भी सूख जाते हैं। ऐसे में वह लोग निकट के नालों का पानी इस्तेमाल में लाते हैं। उन्होंने बताया कि जल शक्ति विभाग की ओर से कुछ गांवों में पाइपें तो बिछाई हैं, लेकिन कभी कभार ही पानी की आपूर्ति की जाती है और वह लोग कुदरती स्रोतों के पानी पर ही निर्भर है। उन्होंने बताया कि गत दो वर्ष से उनके क्षेत्र में सरकारी पाइपों से पानी की आपूर्ति बंद थी। अब गत दिनों गांवों के ग्रामीण दूषित पानी पीने से बीमार हुए थे, तब विभाग ने पानी की आपूर्ति को शुरू कराया। ऐसे में वह लोग कुओं और बावली का पानी ही पी रहे हैं। इनके सूख जाने से नदी का पानी इस्तेमाल करते हैं।
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