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डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा:  कश्मीरी पंडितों के साथ जो हुआ, उसके लिए नेकां व कांग्रेस जिम्मेदार

Mon, 21 Mar 2022 12:32 PM IST
kumar गुलशन कुमार अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू

सार

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि राज्यपाल शासन जब तक लागू होता और जगमोहन कमान संभालते। तब तक हालात बहुत बिगड़ चुके थे। पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. फारूक अब्दुल्ला 1990 में घाटी छोड़कर लंदन भाग गए थे और 1996 में लौटे थे।
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केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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घाटी में कश्मीरी पंडितों के साथ जो हुआ, उसके लिए नेशनल कांफ्रेंस और कांग्रेस जिम्मेदार है। हालात तो उसी दिन खराब होना शुरू हो गए थे जब शेख अब्दुल्ला ने व्यक्तिगत लाभ के लिए नीतियों को जम्मू-कश्मीर में लागू करना शुरू किया था। नेहरू जी ने उनका साथ दिया था, लेकिन वर्ष 1987 के चुनाव में नेशनल कांफ्रेंस ने सरकार बनाने के लिए सरकारी मशीनरी का इस्तेमाल किया। जान बूझकर लोगों को हराया गया। उस समय केंद्र में राजीव गांधी की सरकार थी। यहीं से कश्मीरी पंडितों के खिलाफ अत्याचार शुरू हो गया। यह बातें केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने लखनपुर में मीडिया के सवालों के जवाब में कही। 

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उन्हाेंने कहा कि राज्यपाल शासन जब तक लागू होता और जगमोहन कमान संभालते। तब तक हालात बहुत बिगड़ चुके थे। पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. फारूक अब्दुल्ला को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि जिन्हें यह असलियत एक फिल्म नजर आ रही है, वे लोग 1990 में घाटी छोड़कर लंदन भाग गए थे और 1996 में लौटे थे।

डॉ. सिंह ने कहा कि कश्मीर घाटी में 1987 के बाद हालात बिगड़े तो सबसे पहले भाजपा के कश्मीर अध्यक्ष टीका लाल टपलू की हत्या की गई। जिसके बाद प्रेम नाथ कौल, नीलकंठ गंजू की भी हत्या हुई। उन्होंने कहा कि स्क्वार्डन लीडर रवि खन्ना की सरेआम घाटी में हत्या कर दी गई थी। हत्यारे ने नकाब भी नहीं पहना था, लेकिन पूर्ववर्ती सरकारों ने हत्यारे यासीन मलिक को वीवीआईपी बनाए रखा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह के आने के बाद उसके खिलाफ कार्रवाई की संभावना बनी और वो संभव हुआ जो तीस साल पहले हो जाना चाहिए था। 
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डॉ. सिंह ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती कहती हैं कि कश्मीरी पंडितों के विस्थापन के समय भारत सरकार ने कुछ नहीं किया। लेकिन वो ये बताएं कि उस समय गृहमंत्री कौन था और अपहरण किसकी बेटी का हुआ था। कहा कि कश्मीर के इस काले अध्याय को दफनाकर रखने का पूरा प्रयास हुआ। नेशनल कांफ्रेंस और कांग्रेस उस समय सरकार बनाते थे। जब दस से आठ प्रतिशत मतदान होता था। वे चाहते थे कि हालात खराब रहे और इस हालात में वे बार मुख्यमंत्री बनते थे, लेकिन अब ऐसा नहीं होने वाला है।

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