उन्होंने कहा कि यह बात इनको (सरकार) भी सोचनी चाहिए कि पहले सभी पार्टियों के नेताओं को एक साथ बुलाकर उनकी राय पूछें लेकिन ऐसा नहीं किया उन्होंने। प्रधानमंत्री ने लाल किले से ऐसे ऐलान कर दिया कि चुनाव करवाएंगे जैसे कोई हिटलर करता है।
एक तरफ तो चुनाव की बात करते हैं लेकिन दूसरी ओर 35ए के साथ छेड़छाड़ कर संविधान पर हमला कर रहे हो, ऐसे में हम कैसे लोगों के पास वोट मांगने जाएंगे। पहले हमारे साथ इंसाफ हो तभी कुछ हो पाएगा। अगर आपका रास्ता यही है तो फिर हमारा रास्ता अलग है।
डॉ फारूक ने कहा कि ऐसे में हम आपके साथ चुनाव में भाग नहीं ले सकते। न सिर्फ यह चुनाव बल्कि लोक सभा और विधान सभा के चुनावों में भी हम भाग नहीं लेंगे।
गौरतलब है कि हाल ही में कुछ दिन पूर्व डॉ फारूक अब्दुल्ला ने एक कार्यक्रम के दौरान अपने संबोधन में लोगों से कहा था कि डॉ सरकार ने पंचायती चुनावों की घोषणा की है, यह कोई हिन्दुस्तान और पाकिस्तान का फैसला नहीं है बल्कि यह आपकी अपनी जिन्दगी को बेहतर बनाने का फैसला है।