ये कंपनियों के अपने केंद्र होते हैं, जहां तकनीक, रिसर्च एंड डेवलपमेंट, वित्त, अकाउंटिंग, डेटा एनालिटिक्स, साइबर सुरक्षा, मानव संसाधन, कानूनी प्रक्रियाओं और ग्राहक सेवाओं जैसे काम किए जाते हैं। ऐसे केंद्रों के लिए सबसे बड़ी जरूरत प्रशिक्षित मानव संसाधन की होती है। यही प्रदेश के लिए सबसे बड़ा अवसर भी है।
कंपनी बताएगी जरूरत, सरकार तैयार करेगी युवा
श्रम एवं रोजगार विभाग जीसीसी कंपनियों की वास्तविक जरूरत के आधार पर प्रशिक्षण व्यवस्था तैयार करने की योजना बना रहा है। कंपनियां बताएंगी कि उन्हें किन पदों पर कितने लोगों की जरूरत है और कब जरूरत है। इसके बाद विश्वविद्यालयों, कौशल विकास विभाग और आईटीआई नेटवर्क के साथ मिलकर उसी अनुरूप प्रशिक्षण दिया जाएगा।
पीएम सेतु के तहत अपग्रेड किए जा रहे आईटीआई नेटवर्क का इस्तेमाल आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर, नेटवर्क ऑपरेशन और फैसिलिटी से जुड़े तकनीकी पदों के लिए युवाओं को तैयार करने में किया जा सकता है। जिला रोजगार एवं परामर्श केंद्र भी युवाओं को जीसीसी में उपलब्ध करियर विकल्पों की जानकारी देंगे।
हर साल बाहर जा रही स्थानीय प्रतिभा
मिशन युवा बेसलाइन सर्वे 2024-25 के मुताबिक जम्मू-कश्मीर में युवा बेरोजगारी दर 17.4 प्रतिशत है, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर यह 10.2 प्रतिशत है। सितंबर 2025 तक 3.6 लाख से अधिक शिक्षित युवा रोजगार कार्यालयों में पंजीकृत थे। बड़ी संख्या में इंजीनियर, अकाउंटेंट, विश्लेषक और अन्य पेशेवर रोजगार के लिए दूसरे राज्यों का रुख करते हैं। वहीं, भारत में जीसीसी क्षेत्र तेजी से विस्तार कर रहा है। 2030 तक देश में इससे जुड़े पेशेवरों की संख्या करीब 34.6 लाख पहुंचने का अनुमान है। ऐसे में जम्मू-कश्मीर के लिए अपने शिक्षित युवाओं को इसी क्षेत्र से जोड़ने का अवसर तैयार हो सकता है।
इंजीनियरिंग तक सीमित नहीं होंगे अवसर
रोजगार के अवसर केवल इंजीनियरों के लिए नहीं हैं। वित्त और अकाउंटिंग, डेटा एनालिटिक्स, सॉफ्टवेयर, साइबर सुरक्षा, मानव संसाधन, ग्राहक सेवा, लीगल प्रोसेस और हेल्थकेयर डेटा जैसे क्षेत्रों में भी बड़ी संख्या में नौकरियां हैं। विशेष प्रशिक्षण के जरिए कॉमर्स, साइंस और ह्यूमैनिटीज के स्नातकों को भी इन भूमिकाओं के लिए तैयार किया जा सकता है।