70 साल की गुलामी के बाद पश्चिमी पाकिस्तान से आए शरणार्थियों को नागरिकता मिली है। मोदी सरकार ने इतिहास रच दिया है। अनुच्छेद 370 खत्म करने के बाद ही इन लोगों को इंसाफ मिल सका है। अब इन शरणार्थियों के चेहरे पर खुशी झलकेगी। साथ ही वे भी अपने को मुख्यधारा का हिस्सा महसूस करेंगे। उनके बच्चों को नौकरी तथा केंद्र की अन्य सुविधाओं का भी हक मिल सकेगा। ये बात डॉ. जितेंद्र सिंह (पीएमओ में राज्यमंत्री), ने कही।
पिछले सात दशक से जम्मू कश्मीर में रह रहे शरणार्थियों, वाल्मीकि और गोरखा समाज के लोगों को नागरिकता के अधिकार से वंचित रखा गया था। उनके बच्चे किसी भी सरकारी सुविधा का लाभ नहीं उठा पा रहे थे। वे नौकरी के अधिकार से भी वंचित थे। अब उन्हें उनका हक मिला है। -लब्बा राम गांधी, अध्यक्ष-पश्चिमी पाक शरणार्थी एक्शन कमेटी