शहर के प्रमुख जच्चा-बच्चा अस्पताल एसएमजीएस में ईएनटी में करीब 15 और गायनी में इससे अधिक ऑपरेशन किए जाते हैं। इसके अलावा सुपर स्पेशलिटी अस्पताल जम्मू में कार्डियोल\जी, सीटीवीएस और यूरोल\जी यूनिटों में दर्जनों ऑपरेशन किए जाते हैं।
मौजूदा सर्दियों की छुट्टियों के कारण कई वरिष्ठ फैकल्टी के अवकाश पर रहने से ऑपरेशन की संख्या कम हुई है। उधमपुर से जीएमसी में सर्जरी करवाने आए राहुल शर्मा ने कहा कि उन्हें तीन माह बाद की डेट मिली है। लेकिन उनकी बाजू में दर्द बढ़ता जा रहा है, जिससे उन्हें मजबूरन निजी अस्पताल में जाना पड़ेगा।
किसी भी मरीज के लिए ऑपरेशन जिंदगी का दूसरा नाम होता है, चाहे वह बड़ा हो या छोटा। मनोचिकित्सक डॉ. जगदीश थापा के अनुसार ऑपरेशन के बाद मरीज का मानसिक तनाव कम हो जाता है। यह विकास उसे जल्दी ठीक होने में मदद देता है। लेकिन इसके विपरीत किन्हीं कारणों से ऑपरेशन देरी से होने से उसका मानसिक तनाव बढ़ जाता है। इससे उसे शारीरिक और मानसिक तौर पर परेशान होना पड़ता है।
रूटीन ऑपरेशन में महीनों की डेट मिलने पर तीमारदारों को मजबूरन अपने मरीजों को निजी अस्पतालों का सहारा लेना पड़ता है। लेकिन इसमें उन्हें समय की बर्बादी के साथ आर्थिक परेशानी झेलनी पड़ती है। अगर सामान्य ऑपरेशन पर किसी निजी क्लीनिक पर तीस हजार रुपये खर्चा हो रहा है तो वह सरकारी अस्पताल में 15 से 20 हजार रुपये में हो जाता है। इसी तरह ऑर्थो, सर्जरी, आई, गायनी, ईएनटी ऑपरेशन के लिए निजी अस्पताल में लागत सरकारी अस्पताल के मुकाबले दोगुने-तिगने स्तर तक पहुंच जाती है।
मरीजों को सभी सुविधाएं मुहैया करवाई जा रहीं : प्रिंसिपल
जीएमसी की प्रिंसिपल डॉ. सुनंदा रैना का कहना है कि रूटीन ऑपरेशन में मरीजों को उचित चिकित्सा सुविधाएं मुहैया करवाने के सभी प्रयास किए जाते हैं। मरीजों को लोड को देखते हुए उन्हें डेट दी जाती है।