सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी को स्मृति चिन्ह देते जम्मू विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक। स्रोत:
जम्मू विवि के वैज्ञानिकों ने खोजी लद्दाख में उगने वाले मशरूम की दुर्लभ प्रजाति
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। ऊंचे पहाड़ी इलाकों में सैनिकों की सेहत को प्यूरोटस शेंटेली दुरुस्त रखेगा। जम्मू विश्वविद्यालय के दो वैज्ञानिकों ने लद्दाख में उगने वाले मशरूम की दुर्लभ प्रजाति खोजी है। यह खास तौर पर कारगिल में द्रास और मुश्कोह के ठंडे, सूखे ट्रांस-हिमालयन क्षेत्र में पाई जाती है। इसके औषधीय और पोषण संबंधी लाभ को देखते हुए इसे एक अहम खोज माना जा रहा है।
इस प्रजाति को खोजने वाले जम्मू विश्वविद्यालय के बॉटनी विभाग के सैयद अजहर जवाद हाशमी और डीन लाइफ साइंसेज प्रो. यशपाल शर्मा ने नई दिल्ली में थल सेनाध्यक्ष जनरल उपेंद्र द्विवेदी से मुलाकात कर अपनी नई खोज की जानकारी दी। उन्हें बताया कि दूरस्थ और दुर्गम इलाकों में तैनात इस मशरूम के जरिए सैनिकों के स्वास्थ्य और पोषण का ध्यान रखा जा सकेगा।
जनरल द्विवेदी ने दोनों वैज्ञानिकों की इस खोज को अहम बताया और अपनी ओर से इसे आगे बढ़ाने में सहायता का भरोसा दिलाया। उन्होंने कहा कि जैसे प्लुरोटस शेंटेली सबसे कठिन जलवायु में पनपता है, वैसे ही भारतीय सैनिक भी दुनिया की सबसे मुश्किल सीमाओं में से एक पर जीवनरक्षा के काम में जुटे हैं। बता दें कि इस पौष्टिक मशरूम की खोज केंद्र के पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के राष्ट्रीय हिमालयी अध्ययन मिशन (एनएमएचएस) के तहत मंजूर एक रिसर्च प्रोजेक्ट के दौरान की गई थी।