जीएसटी पर आम सहमति बनाने की रियासत सरकार की कोशिश कामयाब होती नहीं दिख रही है। विधानसभा के विशेष सत्र से पहले बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में नेशनल कांफ्रेंस और कांग्रेस ने सरकार की नीयत पर सवाल खड़े किए। विपक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार रियासत के विशेष दर्जे से छेड़छाड़ करना चाहती है।
नेशनल कांफ्रेंस का आरोप है कि विधेयक का ड्राफ्ट बनाने से पहले विपक्ष से सलाह नहीं मांगी गई और आम सहमति का दिखावा किया जा रहा है। मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने बैठक में कहा कि सरकार सभी पक्षों से सलाह मांग रही है। व्यापारी समाज की सलाह को भी तव्वजो दी जाएगी।
यह आम सहमति की कोशिश है ताकि नया कानून बनाने से पहले विधानसभा में अच्छे माहौल में विस्तार से चर्चा की जा सके। सरकार ने कर निर्धारण से पहले सहमति बनाने की सार्थक कोशिश की है।
'जीएसटी के बाद भी बना रहेगा राज्य का विशेष दर्जा'
जीएसटी
- फोटो : Demo Photo
वित्त मंत्री डा. हसीब द्राबू ने जीएसटी के प्रस्तावित स्वरूप को विस्तार से बताते हुए कहा कि जीएसटी के बाद भी जम्मू कश्मीर का विशेष दर्जा बना रहेगा। नए कानून की जरूरत है ताकि व्यापार के लिए उचित माहौल बन सके और दोहरे कर की समस्या से बाधा पैदा नहीं हो।
उन्होंने बताया कि रियासत में इसे लागू करना जरूरी है, क्योंकि अगर इसे लागू नहीं किया जाता है तो रियासत में दो तरह की टैक्स की व्यवस्था करनी होगी। इसके साथ ही रियासत को पांच हजार करोड़ का नुकसान भी होगा।
महबूबा ने आशा व्यक्त की कि विधानसभा में इस विषय पर महत्वपूर्ण उपयोगी चर्चा होगी। ठोस सुझावों और सिफारिशों के साथ जीएसटी को लागू किया जाएगा, ताकि जीएसटी लागू होने से रियासत की वित्तीय और राजनीतिक स्वायत्तता प्रभावित न हो। बैठक में उपमुख्यमंत्री निर्मल सिंह, पीडीपी के मोहम्मद सरताज मदनी, मुजफ्फर हुसैन बेग और निजामुद्दीन भट्ट ने भाग लिया।