नई सरकार के गठन में देरी से डाइट के भुगतान का मामला लटक गया है। जीएमसी सहित एसोसिएटेड अस्पतालों में मरीजों को निशुल्क दी जा रही डाइट के लिए जीएमसी प्रशासन पर करीब दो करोड़ रुपये की देनदारी है, लेकिन भुगतान पर कुछ नहीं हो पाया है।
लिहाजा मरीजों के निवाले पर भी संकट बरकरार है। अस्पताल के अधीक्षक डा. रविंद्र रतनपाल के अनुसार डाइट के भुगतान के लिए सरकार को लिखा गया है। सरकार के गठन के बाद ही कुछ हो पाएगा।
जीएमसी सहित एसोसिएटेड अस्पतालों में एसएमजीएस, सीडी, साइक्रेटरी अस्पताल के अलावा सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में मरीजों को निशुल्क सुबह, दोपहर और शाम को निशुल्क डाइट मुहैया करवाई जाती है। देनदारी में जीएमसी पर सबसे ज्यादा बकाया है।
एसएमजीएस दूसरे नंबर पर है। ठेकेदारों का कहना है कि भुगतान न होने से मुलाजिमों को वेतन देना भी मुश्किल हो रहा है। बाजार में भी कर्ज बढ़ गया है। भुगतान न करने पर नवंबर 2014 में ठेकेदार एक दिन डाइट सेवा बंद भी कर चुके हैं।
इसके बाद अभी तक भुगतान नहीं किया गया है। डाइट सेवा से सबसे ज्यादा सुदूरवर्ती इलाकों से आने वाले मरीजों और तीमारदारों को राहत मिलती है। इनमें अधिकांश मरीज आर्थिक तौर पर कमजोर होते हैं। उन्हें अस्पताल में ही डाइट से खाना उपलब्ध होता है।
इन अस्पतालों में रोजाना 1100-1200 इंडोर मरीजों को डाइट मुहैया करवाई जाती है। जीएमसी में मरीज के साथ आए अखनूर निवासी रोशनदीन ने कहा कि डाइट जैसी सेवाओं को नियमित रखने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जाने चाहिए। ऐसी सुविधा से मरीजों को आर्थिक तौर पर काफी राहत मिलती है।