रियासत में पिछले साल अपराध की घटनाओं में गिरावट आई है। यह खुलासा डीजीपी के राजेंद्रा कुमार द्वारा जारी क्राइम गजट-2014 में हुआ, जिसे श्रीनगर क्राइम हेडक्वार्टर में रिलीज किया गया। गजट में रियासत में अपराध स्थिति की सूचना है और इसमें उपलब्ध डाटा के आधार अपराध को नियंत्रित करने के लिए रणनीति बनाने के साथ आवश्यक कदम उठाने में मदद मिलेगी।
इस मौके पर डीजीपी ने कहा कि विशेष अपराधों की जांच में क्राइम ब्रांच की अहम जिम्मेदारी है। एजेंसी ने अपराध के मामलों को हल करने के लिए जांच में आधुनिक प्रक्रिया को अपनाया है। डीजीपी ने कहा कि जांच एजेंसियों को अपना तंत्र मजबूत करना होगा। साथ ही सिविल सोसाइटी भी क्राइम जांच में अहम रोल अदा कर सकती है। गजट में पिछले वर्षों की तुलना में वर्ष 2014 में अपराध में गिरावट आई है।
वर्ष 2014 में 25,390 केस दर्ज किए गए, जबकि 2013 में 26,907 केस दर्ज हुए थे। महिलाओं के खिलाफ भी अपराध में कमी आई है। 2013 के 3,714 के मुकाबले 2014 में मात्र 3,535 केस दर्ज हुए। इस मौके पर एडीजीपी एसके मिश्रा, एसपी वैद, एसएम सहाय, दिलबाग सिंह और एल मोहंती, आईजीपी एके चौधरी, एसजेएम गिलानी, एजी मीर और जगजीत कुमार, एसएसजी के डायरेक्टर एसए मुज्तबा आदि उपस्थित थे।
अर्द्धसैनिक बल के अधिकारियों के साथ सुरक्षा बैठक
डीजीपी के राजेंद्रा कुमार ने बुधवार को श्रीनगर में पुलिस के अलावा अर्द्धसैनिक बलों और एजेंसियों के अफसरों के साथ सुरक्षा बैठक कर कानून व्यवस्था पर गंभीर विचार-विमर्श किया। खासकर घाटी और आगामी श्री अमरनाथ यात्रा को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था का अध्ययन किया गया। इनमें पुलिस के उच्च अफसरों के अलावा सीआरपीएफ, इंटेलिजेंस, प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित थे।
डीजीपी ने घाटी में शांति बहाल करने के लिए तमाम सुरक्षा एजेंसियों को आपसी तालमेल के जरिये काम करने को कहा। बैठक में सीआरपीएफ के आईजी अतुल कन्याल, आईबी के ज्वाइंट डायरेक्टर दीपक चौधरी, आईजी सीआरपीएफ (आपरेशन) नलिन प्रभात, एसबी के अतिरिक्त आयुक्त एसके झा, आईजीपी एसजेएम गिलानी, एजी मीर, जेपी सिंह और अन्य अफसर मौजूद रहे।