खड़ा मढ़ाना स्थित अखंड परमधाम आश्रम में चल रही श्री शिव महापुराण कथा के चौथे दिन बड़ी संख्या में भक्तों ने कथा श्रवण किया। कथावाचक परम पूज्य महाराज सुभाष शास्त्री ने भगवान शिव की महिमा और उनके नामों का गुणगान किया।
शास्त्री जी ने बताया कि भगवान सदाशिव पंचमुखी हैं और उनके मुखों से पांच प्रकार के मंत्र प्रकट हुए हैं। ऊं, ऊं नमः शिवाय, गायत्री मंत्र, महामृत्युंजय मंत्र, और राम मंत्र। उन्होंने भक्तों को यह भी बताया कि भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए आक, धतूरा, भांग, दूब, शमी पत्र और बेलपत्र अत्यंत प्रिय हैं। जो भक्त इन सामग्रियों से शिव जी की पूजा करते हैं, उनकी पूजा सफल होती है। कथा के दौरान शास्त्री ने बताया कि भगवान शिव की आंखों में आए आंसुओं से रुद्राक्ष की उत्पत्ति हुई। उन्होंने माता सरस्वती, माता लक्ष्मी और महागौरी की उत्पत्ति के बारे में भी जानकारी दी और अंत में नारद मोह की कथा सुनाई। संवाद