प्लास्टिक सड़कों का निर्माण एक नई पहल है। ये प्लास्टिक कचरे और अन्य निर्माण सामग्री से तैयार होती हैं। इस योजना से पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा बन चुके प्लास्टिक कचरे के निपटान में भी उचित मदद मिलेगी। प्लास्टिक सड़कों के निर्माण में उपयोग किए जाने वाले माल को 10 फीसदी तक कम कर देता है। ये सड़कें अधिक टिकाऊ होती हैं और सामान्य सड़कों की तुलना में लंबी होती हैं।
मंदिरों के शहर जम्मू में प्लास्टिक की सड़कों का निर्माण करने की तैयारी की जा रही है। जम्मू शहर के आसपास पायलट परियोजना के रूप में प्लास्टिक सड़कों के निर्माण के बाद इसे जम्मू-कश्मीर के अन्य जिलों में भी शुरू किया जाएगा। प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण समिति (जेकेपीसीसी) के चेयरमैन सुरेश चुग ने निदेशक राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण भारत (एनएचएआई) के निदेशक यशपाल जादोन को प्लास्टिक सड़कों के निर्माण के लिए जम्मू शहर के आसपास राष्ट्रीय राजमार्ग पर हिस्सों की पहचान करने के लिए कहा है।
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चुग ने एनएचएआई को पायलट प्रोजेक्ट के आधार पर सड़क निर्माण के लिए आवश्यक प्लास्टिक (जब्त पॉलीथिन) उपलब्ध कराने और जरूरी तकनीकी सहायता प्रदान करने का आश्वासन दिया। निदेशक ने कहा कि जम्मू-कश्मीर पीसीसी और एनएचएआई की संयुक्त पहल को सफल बनाने के लिए सभी रसद व्यवस्थाएं की जा सकती हैं। भारतीय सड़क कांग्रेस ने पहले ही देशभर में प्लास्टिक सड़कों के निर्माण के लिए दिशा निर्देश जारी किए हैं। इसके लिए विशेष प्रोटोकॉल निर्धारित किए गए हैं।
बीएम शर्मा ने बताया कि एनएचएआई की ओर से कुंजवानी में प्लास्टिक कचरे का उपयोग करके पांच किलोमीटर की एक सड़क का निर्माण किया गया था। लेकिन जम्मू-कश्मीर में ऐसी और प्लास्टिक सड़कों की जरूरत है। चुग ने अधिकारियों को राष्ट्रीय राजमार्ग के निर्माण और जल निकायों में सीधे मलबा डालने से होने वाले प्रदूषण की जानकारी दी। हाल ही में एनएचएआई पर रामबन बनिहाल खंड में दो करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया था।