- गांदरबल में विलो विकर कौशल केंद्र में महिलाओं को दिया जा रहा प्रशिक्षण
संवाद न्यूज एजेंसी
श्रीनगर। गांदरबल के कचन केंद्र में विलो विकर कौशल उन्नयन केंद्र महिलाओं को कौशल प्रदान कर सशक्त बना रहा है। इससे वे उस शिल्प के माध्यम से आजीविका कमाने में सक्षम हो रही हैं, जिसमें वर्षों से पुरुषों का वर्चस्व देखा गया है। केंद्र हस्तशिल्प विभाग की कारखानादार योजना के तहत संचालित होता है, जो विशिष्ट शिल्प की पहचान करता है और प्रतिभागियों को प्रशिक्षण प्रदान करता है, जिससे उन्हें अपनी इकाइयां स्थापित करने और अपने कौशल को दूसरों तक पहुंचाने में सक्षम बनाया जाता है। काचन केंद्र की प्रशिक्षु कुलसुम हमीद (बीए, बीएड) ने कहा कि उन्होंने विलो विकर बुनाई के लिए छह महीने के पाठ्यक्रम में दाखिला लिया है, जिसके माध्यम से वह विभिन्न लेख बनाना सीख रही हैं।
उन्होंने कहा, प्रशिक्षण के तीन महीने पूरे कर लिए हैं और कौशल का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हासिल किया है। इससे मुझे अपनी इकाई स्थापित करने और दूसरों को आजीविका के अवसर प्रदान करने में मदद मिलेगी। कुलसुम ने कहा, अपनी उच्च योग्यता के बावजूद वह पहले अपनी पढ़ाई जारी रखने में असमर्थ थीं, लेकिन कौशल केंद्र ने एक नई राह दिखाई। युवती ने संदेश दिया कि महिलाओं को खुद को घर तक ही सीमित नहीं रखना चाहिए, उन्हें आजीविका कमाने का प्रयास करना चाहिए। एक बार जब मैं अपना प्रशिक्षण पूरा कर लेती हूं, तो मेरा लक्ष्य अपनी इकाई स्थापित करना और अधिक लोगों को इससे जोड़ना है।
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हस्तशिल्प विभाग की योजना से 10
महिलाओं को दिया जा रहा प्रशिक्षण
केंद्र के संचालन गुलाम मुहम्मद माग्रे ने बताया कि दिसंबर में शुरू किया गया कौशल उन्नयन केंद्र हस्तशिल्प विभाग की योजना के तहत 10 स्थानीय महिलाओं को प्रशिक्षण दे रहा है। माग्रे के पास शिल्प में तीन दशक से अधिक का अनुभव है और विलो दीवार घड़ी बनाने के लिए 2017 में राज्य पुरस्कार प्राप्त किया है। उन्होंने कहा, हमारा ध्यान दैनिक उपयोग के लिए विभिन्न प्रकार की विलो टोकरियां बनाने पर है। इन महिलाओं द्वारा अर्जित कौशल उनके लिए स्थायी आजीविका सुनिश्चित करेगा। खास बात यह है कि यह काम आम तौर पर पुरुषों द्वारा किया जाता है, जबकि यहां हम महिलाओं को कौशल केंद्र में सक्रिय रूप से भाग लेते हुए देखते हैं।
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''कारखानदार योजना'' का लक्ष्य अधिक व्यक्तियों तक शिल्प निर्माण कौशल की पहुंच का विस्तार करना है। पाठ्यक्रम पूरा होने पर हम योजना के तहत अधिक लोगों को प्रशिक्षित करने के लिए पूर्व प्रशिक्षुओं को नियुक्त करते हैं। उन्हें 2000 रुपये का मासिक वजीफा दिया जाता है, जबकि मास्टर ट्रेनर्स को भी 2000 रुपये के साथ 25000 रुपये कच्चे माल और उपकरण प्राप्त करने के लिए दिए जाते हैं।
नसीर अहमद, अतिरिक्त निदेशक, हस्तशिल्प विभाग, गांदरबल