- रिजर्व बैंक ने बैंकों से कहा - उद्योगों को औपचारिकता और ऋण अनुशासन की राह दिखाएं
- भारत-इंग्लैंड व्यापार समझौते से एमएसएमई को मिलेंगे अंतरराष्ट्रीय मौक
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में छोटे और मझोले उद्योगों (एमएसएमई) का दायरा तेजी से बढ़ रहा है। बीते चार वर्षों में पंजीकृत इकाइयों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इस अवधि में जम्मू-कश्मीर में एमएसएमई इकाइयों की संख्या करीब 24 गुना बढ़कर 7.47 लाख हो गई है। लद्दाख में यह संख्या 22 गुना बढ़कर 18,708 हजार पर पहुंच गई है। बुधवार को जम्मू में हुई एमएसएमई सशक्त समिति की 67वीं बैठक में यह जानकारी सामने आई।
बैठक अप्रैल से जून की तिमाही की समीक्षा के लिए आयोजित की गई थी। इसकी अध्यक्षता रिजर्व बैंक के क्षेत्रीय निदेशक चंद्रशेखर आजाद ने की। भारत-इंग्लैंड के बीच हुए व्यापार समझौते का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इसमें एमएसएमई को विशेष प्राथमिकता दी गई है। यह भारतीय एमएसएमई को व्यापारिक सहूलियत और नए बाजार उपलब्ध कराएगा। उन्होंने क्षेत्र में उद्योगों को औपचारिक दायरे में लाने, उद्यम पोर्टल पर पंजीकरण कराने और ट्रेड्स मंच से जोड़ने पर जोर दिया। साथ ही बैंकों से कहा कि वे ऋण अनुशासन को बढ़ावा दें ताकि इकाइयां मजबूती से खड़ी हो सकें। बैठक में बैंकों के प्रदर्शन की समीक्षा की गई। इसमें एमएसएमई क्षेत्र को दिए जा रहे ऋण, प्रधानमंत्री टास्क फोर्स की ओर से तय किए गए लक्ष्यों की पूर्ति, गैर-निष्पादित खातों की स्थिति, क्रेडिट गारंटी योजना के तहत दावे, प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम के अंतर्गत प्रायोजित मामलों की स्थिति और एमएसएमई क्लस्टरों में बैंकिंग सेवाओं की उपलब्धता पर चर्चा हुई।
संकट में चल रही इकाइयों को दोबारा खड़ा करने के लिए बनाए गए पुनरुद्धार और पुनर्वास ढांचे की भी समीक्षा की गई। यह भी तय हुआ कि सभी हितधारक आपसी समन्वय से कार्य करें ताकि क्षेत्र में उद्यमिता को और मजबूती मिले। बैठक में उद्योग और वाणिज्य विभाग, एमएसएमई विकास कार्यालय के अधिकारियों के साथ जेके बैंक, भारतीय स्टेट बैंक, पंजाब नेशनल बैंक, केनरा बैंक और जेके ग्रामीण बैंक के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। इसके अलावा यूटीएलबीसी जम्मू व लद्दाख के संयोजक बैंकों तथा पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स, इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स और बाड़ी ब्राह्मणा उद्योग संघ के पदाधिकारी भी बैठक में मौजूद रहे।