जम्मू। प्रदेश में महिला उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए जम्मू-कश्मीर ग्रामीण आजीविका मिशन (जेकेआरएलएम) के तहत 48 हजार स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) बनाए गए हैं, जिनमें चार लाख महिलाओं को जोड़ा गया है। जमीनी स्तर पर महिला उद्यमिता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से पहल शुरू की गई है।
प्रदेश में महिला उद्यमी पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने और मजबूत कार्यबल बनाने के उद्देश्य से सरकार ने इस पहल को शुरू किया है।
सरकारी प्रवक्ता ने कहा कि उपराज्यपाल के नेतृत्व में सरकार ने पूंजी तक पहुंच बढ़ाने, पुन: कौशल व नए कौशल के लिए गुणवत्ता परामर्श देने, एसएचजी से महिला उद्यमियों को नए बाजार देने के लिए प्रतिबद्ध है। सरकार ने साथ, उम्मीद, मुमकिन, हौसला और तेजस्विनी जैसी विभिन्न पहल शुरू की हैं जो महिलाओं को सामाजिक और आर्थिक रूप से स्वतंत्र बना रही हैं। ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से सितंबर 2021 में उपराज्यपाल ने ‘साथ’ कार्यक्रम शुरू किया था। इसके तहत उद्यम स्थापित करने वाले चयनित एसएचजी सदस्यों के लिए एक व्यापक परामर्श कार्यक्रम शुरू किया है। इसमें सदस्यों को विभिन्न विपणन प्रक्रियाओं के प्रति जागरूक किया जाता है, ताकि वह अपने मौजूदा उद्यमों को एक बड़े व्यापारिक घरानों में बदल सकें। इसके साथ उत्पादन और बिक्री बढ़ाने, ब्रांडिंग, फॉरवर्ड लिंकेज, बिक्री और व्यवसाय प्रबंधन पर भी सुविधा दी जाती है। जेकेआरएलम ने पांच हजार एसएचजी सदस्यों में से 100 महिला उद्यमियों को चिह्नित कर उनके उद्यमों को विकसित करने में सहायता की जा रही है। 5 लाख ग्रामीण एसएचजी सदस्यों को उत्पादों को प्रदर्शित करने और उपभोक्ताओं के साथ खरीदारों से सीधे जुड़ने के लिए एक मार्केट लिंकेज प्लेटफॉर्म महिला हॉट स्थापित किया है। प्रदेश सरकार महिलाओं को नौकरी पाने की बजाय नौकरी देने वाली बनाना चाहती है, ताकि वह प्रदेश की जीडीपी में अपना योगदान दे सके।