केंद्र सरकार की ओर से कश्मीर में भारी संख्या में सुरक्षा बलों की तैनाती के साथ ही एलओसी से सटे पुंछ जिले में रविवार को रैपिड एक्शन फोर्स के जवानों को तैनात किया गया है। इससे पहले जम्मू में रैपिड एक्शन फोर्स के जवानों को तैनात करने को लेकर शनिवार को चर्चा का बाजार गर्म रहा। लोग अपने-अपने स्तर पर कयास लगा रहे हैं कि कहीं 35-ए को निरस्त तो नहीं किया जाना है? पाक के कश्मीर में आतंकी शिविरों पर हमले की योजना तो नहीं? कहीं जेल में बंद यासीन मलिक की मौत तो नहीं हो गई?
भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास बसे गांव बैनगलाड निवासी राकेश कुमार, नंद लाल, चुनी लाल, प्रेमपाल आदि ने बताया कि कश्मीर में इतने जवानों की तैनाती से कश्मीरी घबराए हैं, लेकिन हमें भरोसा है कि केंद्र सरकार जो भी कदम उठाएगी, देश हित के लिए ही उठाएगी।
उन्होंने यह भी बताया कि 35ए की जरूरत ही नहीं है। केवल कश्मीरी लोग ही इसका फायदा ले रहे हैं। जम्मू सभांग के लोग तो पहले ही कश्मीरियों से पिछड़े हुए हैं। उन्होंने 35-ए को तोड़ने का समर्थन किया। वहीं पाकिस्तान में चल रहे आतंकी कैपों पर भी कार्रवाई की मांग उठाई।
सोशल मीडिया पर यह भी कहा जा रहा है कि दिल्ली की तिहाड़ जेल में अलगाववादी नेता यासीन मलिक का निधन हो गया, जिस कारण अतिरिक्त फोर्स लगाई गई है। आज दिन भर चर्चा का बाजार गर्म रहा और अपनी-अपनी ओर से कयास लगाए जा रहे हैं।
सीमावर्ती ग्रामीण केंद्र सरकार के निर्णय से खुश नजर आए। जम्मू शहर में रैपिड एक्शन फोर्स के पहुंचने पर लोगों की राय है कि अमरनाथ श्राइन बोर्ड विवाद के समय जैसा माहौल था, वैसा ही माहौल बनने जा रहा है।