मानसून के अंतिम पड़ाव पर देश की राजधानी दिल्ली सहित अन्य राज्यों में डेंगू के कहर ने रियासत में सतर्कता बढ़ा दी है। श्री माता वैष्णो देवी में रोजाना हजारों श्रद्धालुओं की आमद के साथ राज्य में बड़ी संख्या में बाहरी राज्यों से लोग पहुंच रहे हैं, जिससे डेंगू को लेकर चुनौती बढ़ी है।
हालांकि जम्मू संभाग में अभी कुछ मामले ही सामने आने से थोड़ी राहत है, लेकिन साथ लगते राज्यों में डेंगू के मामले बढ़ने से यहां भी बढ़ोतरी हो सकती है। अस्पतालों में संदिग्ध बुखार के पीड़ितों का आना जारी है।
जम्मू में अब तक पांच मामले पाजिटिव आ चुके हैं, लेकिन शहर के प्रमुख जीएमसी और एसएमजीएस अस्पताल में लगातार संदिग्ध बुखार के मामले पहुंच रहे हैं। इनमें बच्चों से लेकर हर आयु वर्ग के लोग पीड़ित हैं।
जीएमसी की माइक्रोबायोलाजी लैबोरेटरी में दर्जन से अधिक मरीजों की डेंगू सैंपल की रिपोर्ट आने का इंतजार है। जिससे साफ है कि डेंगू के मामलों में इजाफा होगा। वर्ष 2014 में डेंगू से राहत रही थी, लेकिन वर्ष 2013 में डेंगू के करीब चार सौ पाजिटिव मामले सामने आए थे।
उस समय हालत यह हो गई थी कि आम लोगों में डेंगू की दहशत को कम करने के लिए सरकार को अक्तूबर 2013 में निजी लैबों में डेंगू बुखार की जांच के लिए रैपिड टेस्ट (एनएस1) पर प्रतिबंध लगाना पड़ा था। एलिजा राइडर टेस्ट (1 जीएम) में ही डेंगू के पाजिटिव होने की पुष्टि होती है। रैपिड टेस्ट में अन्य बुखार से डेंगू पाजिटिव आ जाता है।
कठुआ जिले में दो मामले
कठुआ जिले में डेंगू के दो मामले रिपोर्ट होने से हड़कंप मच गया है। बाहरी राज्यों में काम करने वाले दोनों पीड़ितों का इलाज पंजाब में चल रहा है, जबकि विभाग ने उनके घरोें के आसपास मेलाथियान स्प्रे
करवा दिया है। जिला अस्पताल कठुआ में जांच किट मंगवा ली है, कठुआ के नगरी परोल और हटली मोड़ में सामने आए दोनों मामलों में पीड़ित दिल्ली में काम करते थे और कुछ दिन पहले पाजिटिव पाने पर इलाज जारी है।