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कोरोना संकट के बीच लगा डेंगू का डंक, जम्मू में मिले दो मामले

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जम्मू। कोविड महामारी के बीच डेंगू का संकट खड़ा हो गया है। शहर के विभिन्न इलाकों से डेंगू के दो पॉजिटिव मामले मिले हैं। पीड़ितों को उचित इलाज देने के साथ प्रभावित क्षेत्रों में मच्छरों के खिलाफ अभियान छेड़ा गया है। मानसून के बाद नवंबर तक डेंगू के मामलों में बढ़ोतरी होने की आशंका है। डॉक्टरों के अनुसार डेंगू और कोविड दोनों से पीड़ित होने वाले मरीजों के लिए यह परिस्थितियां जानलेवा हो सकती हैं।
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शहर के त्रिकुटा नगर और जानीपुर इलाके से दो डेंगू के पॉजिटिव मामले मिले हैं। कोविड संकट के बीच डेंगू ने स्वास्थ्य विभाग की परेशानी और बढ़ा दी है। पिछले कुछ सालों में जम्मू, सांबा, कठुआ, पुंछ, राजोरी, उधमपुर और डोडा में डेंगू कई लोगों की जान ले चुका है। वर्ष 2019 में संभाग में 439 डेंगू के पॉजिटिव मामले सामने आए थे, लेकिन राहत यह थी कि आधिकारिक तौर पर डेंगू से कोई मौत नहीं हुई थी। इससे पहले वर्ष 2018 में संभाग में 214 और वर्ष 2013 में आधिकारिक तौर पर रिकार्ड 1838 पॉजिटिव मामले आए थे। इस साल कई लोगों की मौत हुई थी, लेकिन अब परिस्थितियां अलग हैं। पहले स्वास्थ्य विभाग मच्छरों के खात्मे के लिए पूरा जोर लगा देता था, लेकिन अब उसे कोविड को प्राथमिकता देकर डेंगू के खिलाफ लड़ाई लड़नी होगी। जम्मू शहर में ट्रांसपोर्ट यार्ड, एसआरटीसी यार्ड, तालाब तिल्लो, वेयर हाउस, नरवाल मंडी आदि इलाके ऐसे हैं जहां टायरों आदि में पानी रुकने के कारण मच्छर पनपते रहे हैं। डेंगू का लारवा 35 से 40 डिग्री सेल्सियस के तापमान में बन जाता है, मौजूदा समय में भी जम्मू संभाग के विभिन्न जिलों का तापमान 35 से 40 डिग्री के बीच चल रहा है।
डेंगू से बचाव
1. कूलर, गमलों, टूटे बर्तनों, टायरों आदि में पानी अधिक दिन जमा न रहने दें।
2. घर में मच्छरों के खात्मे के लिए सभी उपाय अपनाएं
3. बंद नालियां, निर्माण स्थल, कवर न रहने वाले टैंक आदि पर विशेष ध्यान दें
4. बच्चों में डेंगू के बचाव के लिए जागरूकता बढ़ाएं
डेंगू के लक्षण
1. शरीर में अचानक तेज दर्द होना
2. 104-106 डिग्री तक हाईग्रेड बुखार होना
3. मांसपेशियों में तेज दर्द होना
4. नाक, मुंह और भीतरी हिस्सों में खून का रिसाव होना
कंटेनमेंट जोन में नहीं होगी फॉगिंग
जम्मू। कोविड संकट को देखते हुए इस बार मच्छरों के खिलाफ अभियान में कंटेनमेंट जोन में फॉगिंग को रोका गया है। इसका कारण कंटेनमेंट जोन में संक्रमित मामलों में पीड़ितों को किसी तरह से सांस की दिक्कत होने से बचाव करना है। अधिकांश संक्रमित मामलों में पीड़ितों को होम आइसोलेट किया गया है। जिससे शहर के कई इलाके कंटेनमेंट जोन में चल रहे हैं। हालांकि डेंगू पाजिटिव मामले में संक्रमित व्यक्ति के घर और आसपास के क्षेत्र में फॉगिंग व अन्य दूसरे कदम उठाए जाएंगे, लेकिन ये क्षेत्र कंटेनमेंट जोन से बाहर होने चाहिए।
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पहले से बीमार लोगों के लिए डेंगू और कोविड जानलेवा
जीएमसी के माइक्रोबायोलाजी कोविड लैब में कार्यरत एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. संदीप डोगरा का कहना है कि पहले से विभिन्न बीमारियों से ग्रस्त लोगों के लिए डेंगू और कोविड का मिश्रण जानलेवा हो सकता है। खासतौर पर मधुमेह, उच्च रक्तचाप, हृदय, सांस संबंधी आदि बीमारियों से ग्रस्त लोगों को विशेष एहतियात बरतने की जरूरत है। अगर ऐसे लोगों को डेंगू और कोविड एक साथ हो जाते हैं, तो उनकी तबीयत तेजी से बिगड़ सकती है। डेंगू और कोविड के लगभग समान लक्षण हैं और यह दोनों वायरल इंफेक्शन हैं। दोनों ही मामलों में पीड़ित को आइसोलेट में रखकर उसकी सेहत की निगरानी की जाती है, जबकि दोनों ही मामलों में कोई उचित दवाई नहीं दी जा सकती है।
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