औद्योगिक नीति में संशोधन की मांग
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उद्यमियों की विभिन्न कार्यों की फाइलें सरकारी दफ्तरों में धूल फांक रही हैं। क्लीयरेंस के चक्कर में उद्यमियों को सिडको, सिकाप, जिला उद्योग केंद्र और वित्त विभाग के कार्यालयों में घूमना पड़ रहा है। इसे लेकर फेडरेशन आफ इंडस्ट्री की एक बैठक सोमवार को प्रधान ललित महाजन की अध्यक्षता में हुई और इसका कड़ा विरोध जताया गया।
प्रधान ने कहा कि उक्त क्षेत्रों में फाइलों को क्लीयर नहीं किया जा रहा। उक्त विभाग वित्त विभाग के नए दिशा-निर्देशों का इंतजार कर रहे हैं और इसके पीछे क्या कारण है, अधिकारी इससे भलीभांति परिचित हैं। बैठक में चर्चा हुई कि 2004 औद्योगिक नीति 2014 में खत्म हो गई और दो साल के अंतराल के बाद सरकार की तरफ से मार्च 2016 में नई नीति लागू की गई, लेकिन इसके मापदंड अभी तक तय नहीं किए।
इस नीति में कई कमियां हैं, जो औद्योगिक क्षेत्र की तरक्की में परेशानियां पैदा करेंगे। इसलिए वे लोग चाहते हैं कि उद्योग मंत्री इसमें हस्तक्षेप करें और सरकार से बात करें कि इसमें संशोधन किया जाए। इसके लिए फेडरेशन ने उद्योग मंत्री को प्रस्ताव भी सौंप दिया था, लेकिन अभी तक इस पर कोई अमल नहीं हुआ।