जम्मू। सरकार व्यर्थ व्यय श्रेणी में चल रहे कई कारपोरेशन और अन्य इकाइयों को बंद या उनका निजीकरण करने की तैयारी कर रही है। इस कड़ी में सरकार ने जेएंडके स्माल स्केल इंडस्ट्रीज डेवलपमेंट कारपोरेशन (सिकॉप), जेएंडके मिनरल्स लिमिटेड और जेएंडके इंडस्ट्रीज लिमिटेड को बंद करने का प्रस्ताव तैयार किया है। इसके अलावा जेएंडके सीमेंट लिमिटेड का निजीकरण करने का प्रस्ताव है। हालांकि कोविड संकट के चलते अधिकतर को बंद करने की योजना है।
इन कारपोरेशन और अन्य इकाइयों में पाया गया है कि वे अपने कर्मचारियों को वेतन देने में सक्षम नहीं हैं। सरकार ऐसी कारपोरेशन को सशक्त और मजबूत बनाने के लिए काम कर रही है, लेकिन जो व्यर्थ व्यय श्रेणी में आ रहे हैं उन्हें बंद करने की योजना है। ऐसे कारपोरेशन और इकाइयों के स्टाफ को अन्य इकाइयों में एडजेस्ट कर दिया जाएगा।
उद्योग व वाणिज्य विभाग के आयुक्त सचिव मनोज कुमार द्विवेदी ने बताया कि कोविड संकट के कारण अभी तक ऐसा कोई फैसला नहीं लिया गया है। उन्होंने कहा कि ऐसी कारपोरेशन व अन्य इकाइयों की वित्तीय स्थिति को देखा जा रहा है। अगर वे खुद के कर्मचारियों को वेतन देने में भी सक्षम नहीं हैं तो उन्हें बंद या उनका निजीकरण करने का प्रावधान है। जेेएंडके सीमेंट लिमिटेड लंबे समय से बंद पड़ी है और मौजूदा कोविड संकट के बीच ऐसी इकाइयों का निजीकरण करने से भी अधिक लाभ मिलना मुश्किल है। लेकिन कोशिश की जाएगी कि ऐसी इकाइयों को पुनर्जीवित किया जाए, जिसके बाद अन्य विकल्प पर काम हो। सरकार की ऐसी योजना है कि व्यर्थ व्यय वाले कारपोरेशन को पुनर्जीवित करने पर काम किया जाए। जिस तरह सिकॉप या सिडको के कामकाज में कोई समानता है तो उन्हें अलग या विलय करने पर काम किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि कोविड संकट खत्म होने के बाद ऐसी योजना को अमल में लाने पर काम किया जा सकता है।
इधर, नेकां, पीडीपी और कांग्रेस उतरी फैसले के विरोध में
जम्मू। नेकां और पीडीपी ने सरकार के सार्वजनिक क्षेत्र में बीमार उपक्रमों को बंद या विलय करने के प्रस्ताव का विरोध किया है। नेकां ने अपने आधिकारिक हैंडल पर ट्वीट करते हुए कहा कि जेएंडके सरकार का कई सार्वजनिक उपक्रमों को बंद करने का फैसला चौंकाने वाला है। यह आदेश अनुचित है और इसे रद्द किया जाना चाहिए। पार्टी ने कहा कि प्रदेश प्रशासन बेरोजगारी को बढ़ावा देने का काम कर रहा है। पीडीपी ने भी ट्वीट कर सार्वजनिक उपक्रमों को बंद करने के फैसले को गलत बताया। कहा, ऐसे समय में प्रदेश बेरोजगारी से जूझ रहा है और अधिक रोजगार सृजित करने की जरूरत है। उपराज्यपाल के निर्देश पर इस साल जनवरी में जारी एक आदेश में प्रशासन ने कहा था कि खनिज स्थलों की नीलामी की जानी चाहिए, औद्योगिक संपदा सिडको (राज्य औद्योगिक विकास निगम) को सौंपी जानी चाहिए और संपत्ति के मूल्यांकन के बाद जेएंडके सीमेंट का निजीकरण किया जाएगा। वहीं, कांग्रेस ने इसे कर्मचारियों के हितों के खिलाफ बताया। पार्टी प्रवक्ता ने कहा कि यह फैसला इन संगठनों के कर्मचारियों को प्रभावित करने के अलावा युवाओं को रोजगार की संभावना को कम करेगा। सरकार की संपत्ति को बचाने के लिए फैसलों की समीक्षा करने के साथ अधिक रोजगार के अवसर पैदा किए जाएं।