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संक्रमित बढ़ने पर ऑक्सीजन अैर वेंटिलेटर की कमी बनेगी चुनौती

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जम्मू। जम्मू-कश्मीर में कोरोना संक्रमण का तेजी से प्रसार हो रहा है। इससे आने वाले दिनों में पॉजिटिव मामलों में बढ़ोतरी होना संभव है। इन परिस्थितियों में कोविड अस्पतालों में ऑक्सीजन और वेंटिलेटर की कमी चुनौती बनेगी। कोविड मरीजों को कोविड 1, 2 और 3 लेवल के अस्पतालों में इलाज दिया जा रहा है। इसमें लेवल 1 के अस्पतालों में ही गंभीर मरीजों के लिए वेंटिलेटर उपलब्ध हैं। लेकिन मरीजों की संख्या बढ़ने की सूरत में चुनौतियां बढ़ेंगी।
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जम्मू-कश्मीर में कोविड मृत्युदर 1.7 फीसदी है, जो सौ व्यक्तियों पर लिया जाता है। जबकि भारत में ओवरआल यह औसत 2.6 फीसदी है। इसी तरह प्रदेश में पॉजिटिव मरीजों की दर 2.3 फीसदी है, जबकि भारत में यह ओवरआल 7.4 फीसदी है। हालांकि, कोरोना संक्रमण का प्रसार बढ़ने से भविष्य में इस दर में बढ़ोतरी होना संभव है। एसोसिएटेड अस्पतालों की बात करें तो जीएमसी को लेवल 1 श्रेणी में रखा गया है। यहां कोविड संक्रमित गंभीर मरीजों को इलाज दिया जा रहा है। कोविड आइसोलेशन वार्ड में 24 वेंटिलेटर स्थापित हैं। इसके अलावा नए आईसीयू (पुराने सीसीयू को बदलकर बनाया गया वार्ड) में 16 वेंटिलेटर हैं। यहां संदिग्ध मरीजों को रखा जाता है। इसके अलावा सामान्य मरीजों के लिए ओल्ड आईसीयू में 12 और नए आईसीयू में 10 वेंटिलेटर चल रहे हैं। इसी तरह लेवल 2 में सीडी अस्पताल, गांधीनगर ओल्ड व न्यू अस्पताल बनाया गया है, यहां सामान्य तौर पर पॉजिटिव मरीजों को रखा गया है। इन अस्पतालों में ऑक्सीजन उपलब्ध है। लेवल 3 में साइकाइटरी अस्पताल को तैयार रखा गया है। यहां सामान्य लक्षण वाले कोविड मरीजों को रखने का प्रावधान है। इसके अलावा जिला स्तर पर पर्याप्त वेंटिलेटर नहीं हैं। जिससे कोरोना संक्रमित मामले बढ़ने से वेंटिलेटर की कमी खलेगी। प्रदेश में अब तक 200 से अधिक लोगों की कोरोना संक्रमण से मौत हो चुकी है और साढ़े ग्यारह हजार से अधिक लोग संक्रमित हो चुके हैं। जीएमसी के प्रिंसिपल डॉ. नसीब चंद डिगरा के अनुसार कोविड मरीजों को उचित चिकित्सा सुविधाएं मुहैया करवाई जा रही हैं। गंभीर मरीजों के लिए वेंटिलेटर आदि सुविधाएं उपलब्ध हैं।
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