पुराने शहर में खत्म होने की कगार पर खड़ी खस्ताहाल इमारतें किसी भी वक्त भूकंप के झटके या तेज बारिश के आगे ढह सकती है।
नगर निगम की ओर से पुराने शहर में अलग-अलग जगह पर तीन दर्जन लोगों को उनकी इमारतों के खस्ताहाल होने के बारे में नोटिस दिए गए हैं कि भविष्य में इनके अचानक गिरने से कहीं कोई बड़ा हादसा न हो, इसलिए खुद ही पहल करके खस्ताहाल इमारतों को गिराने के लिए प्रेरित किया है। अभी सिवाय एक को छोड़कर किसी ने रुचि नहीं दिखाई है, जिस पर नगर निगम ने भी नोटिस के अलावा कोई सख्त एक्शन नहीं लिया है।
गौरतलब है कि मंदिरों के पुराने शहर में पचास साल पुरानी इमारतें भी हैं, जो वर्तमान में ऐसी स्थिति में हैं कि कभी भी मलबे में तब्दील हो सकती हैं।
बाल-बाल बचे थे परिवार के लोग
ताजा घटना में चार दिन पहले टांगे वाली गली में तेज बारिश के प्रकोप से एक मकान की छत और दीवारें नीचे आ गिरीं। परिवार के लोग बाल-बाल बचे। अभी तक उन्हें भी कोई मुआवजा नहीं दिया जा सका है।
नगर निगम की टीम ने एक टाइम में सर्वे करके तीन दर्जन इमारतों को खस्ताहाल और असुरक्षित घोषित किया था, निगम की नक्शा प्रणाली के तहत पचास साल के बाद इमारत को खस्ताहाल के कगार में माना जाता है।
बावजूद मौत के खौफ से बिना डरे कुछ लोग मजबूरी के कारण, तो कुछ किरायेदारों को रखकर खस्ताहाल इमारतों में समय निकाल रहे हैं। ऐसे में यूं कह लें कि इनकी जिंदगी हर समय दांव पर लगी होती है।
बहुत सारी खस्ताहाल इमारतें चिह्नित
दो साल पहले नगर निगम के खिलाफवर्जी विंग की टीम ने एक मालिक के आवेदन पर अपनी खस्ताहाल इमारत गिरवा दी थी, हालांकि उसे काफी हंगामा भी हुआ था, लेकिन पुलिस ने स्थिति को नियंत्रण करके आपरेशन को सफल बनवाया था।
नगर निगम कमिश्नर सौजन्य शर्मा के खस्ताहाल इमारतों का सर्वे जारी है। बहुत सारी इमारतें खस्ताहाल चिह्नित की गई है।
कई बार वे लोगों की खस्ताहाल इमारतों को गिराने के लिए गए है, लेकिन लोग हंगामा कर देते हैं और कोर्ट का स्टे लाकर उन्हें बाध्य कर देते हैं।
जबकि लोगों को समझना चाहिए, कि इमारत को पहले ही गिरा देना कई जिंदगियां बचा सकता है। उन्होंने लोगों से सहयोग की मांग की है।