सियासत के दो विपरीत ध्रुवों ने स्थिर सरकार की जरुरत के नाम पर भले ही हाथ मिला लिए लेकिन दिलों के दरम्यान दूरियां कायम हैं। जम्मू कश्मीर की समस्या के समाधान की कोशिश जैसे बड़े मुद्दे का हवाला देते हुए भाजपा और पीडीपी के गठबंधन की खिचड़ी पकी और इसमें न्यूनतम साझा कार्यक्रम के भारी-भरकम वादों का तड़का भी लगाया गया लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद जायका बिगड़ जाता है।
गठबंधन के दोनों घटक दल अफस्पा की वापसी के मुद्दे पर फिर आमने -सामने हैं। मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद जिस क्षण दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, गृह मंत्री राजनाथ सिंह से मिलकर गठबंधन सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए रियासत के लिए बाढ़ राहत का विशेष पैकेज मांग रहे थे, ठीक उसी समय जम्मू विधानसभा परिसर में दोनों दलों के क्षत्रप एक-दूसरे के खिलाफ तलवारें भांजते नजर आए।
एक ही दिन में हुए तीन हमले
दरअसल घाटी में एक ही दिन तीन स्थानों पर श्रृंखलाबद्ध आतंकी हमले के बाद भाजपा के सामने आक्रामक तेवर अपनाने के अलावा कोई विकल्प बाकी नहीं रह गया। नतीजतन भाजपा विधायकों ने विधानसभा में जमकर हंगामा किया। भाजपा सदस्य अपनी ही सरकार के घटक दल पीडीपी का संकेतों में विरोध कर रहे थे।
भाजपा विधायकों ने -बिग नो टू अफस्पा रीमूवल- और पाकिस्तान हाय, हाय के नारे वाली तख्तियां लेकर विरोध जाहिर किया। गौरतलब है कि अफस्पा चरणबद्ध वापसी का वादा गठबंधन एजेंडे का हिस्सा है। साथ ही पीडीपी ने बार-बार पाकिस्तान से बातचीत के जरिए कश्मीर समस्या के समाधान पर जोर दिया है। यहां तक कि अलगावादियों से भी बातचीत की जरुरत भी सीएमपी में शुमार है।
सरकार अफस्पा की वापसी के लिए कृतसंकल्प
भाजपा विधायकों के विरोध के दौरान पीडीपी सदस्य सदन में खामोश रहे। इस पर नेकां के देवेन्द्र राणा ने कटाक्ष भी किया कि अजीब गठबंधन है। जब एक दल के सदस्य गरजते हैं तो दूसरा उस पर हंसता है। ठीक एक दिन पहले मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद ने एक सवाल के लिखित उत्तर में सदन को बताया था कि सरकार अफस्पा की चरणबद्ध वापसी के लिए कृतसंकल्प है।
दूसरे दिन गठबंधन के सहयोगी दल भाजपा के विधायकों ने मोर्चा खोल दिया। शिक्षा मंत्री नईम अख्तर कहते हैं कि अफस्पा की कोई जरुरत नहीं रह गई है क्योंकि इससे संदेश जाता है कि रियासत को फौजी कानून के सहारे चलाया जा रहा है। हमलोग लोकतांत्रिक तरीके से हर काम कर रहे हैं। विधानसभा चुनाव में भारी मतदान हुआ है।
AFSPA से आतंकी हमले बंद नहीं हुए
पीडीपी मंत्री कहते हैं कि कैबिनेट ने स्थानीय निकायों के चुनाव को हरी झंडी दे दी है। पंचायतों के अधिकार बढ़ाए जा रहे हैं। ऐसे में अफस्पा जैसे कानून का लोकतांत्रिक प्रक्रिया के साथ तालमेल नहीं दिखता। अफस्पा 25 साल से रियासत में लागू है। फिर भी आतंकी हमले हो रहे हैं। इस कानून से आतंकी हमले बंद नहीं हुए। इस मुद्दे पर गंभीर बहस की जरुरत है।
दूसरी ओर सड़क एवं भवन राज्य मंत्री सुनील शर्मा का मानना है कि अफस्पा की वापसी घातक होगी। उन्होंने सेना को और अधिकार दिए जाने की जरुरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आतंकी हमलों से यह साफ है कि अभी स्थिति में वैसा सुधार नहीं आया है। भाजपा आतंकवाद से कड़ाई से मुकाबले की पक्षधर रही है और इसके लिए अफस्पा का कायम रहना जरूरी है।