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हिरासत में युवक की मौत के बाद जम्मू में बवाल, दो कांस्टेबल निलंबित

Fri, 16 Dec 2016 09:51 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला/जम्मू
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थाने पर तैनात पुलिस बल - फोटो : Amar Ujala
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पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए 20 साल के युवक रिंकू चौधरी की पुलिस की गिरफ्त से छूटने के कुछ घंटों बाद ही वीरवार देर रात मौत हो गई। मृतक के पिता ने बेटे की मौत के लिए कानाचक थाने की गजनसू पुलिस चौकी में पुलिस द्वारा दी गई प्रताड़ना को जिम्मेदार ठहराया है।
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उत्तेजित घरवालों और ग्रामीणों ने शुक्रवार को पुलिस चौकी पर करीब पांच घंटे तक विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने चौकी में तोड़फोड़ भी की। वहां खड़े पुलिस के दो वाहनों को पलट दिया, मोटर साइकिल को नाले में फेंक दिया। पुलिस पर युवक को छोड़ने के लिए रिश्वत लेने और पीट-पीटकर अधमरा करने के आरोप हैं। 

एसएसपी डॉ. सुनील गुप्ता ने बताया कि इस मामले में सेलेक्शन ग्रेड कांस्टेबल मोहम्मद हनीफ और कांस्टेबल अनिल कुमार को निलंबित कर दिया है। एसपी रूरल अरुण गुप्ता को जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई है। मामले से जुड़े सभी लोगों के बयान दर्ज किए जाएंगे।
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मृतक के गले और शरीर पर चोटों के निशान पर एसएसपी ने कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है। दोषी पाए जाने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। डाक्टरों के बोर्ड से पोस्टमार्टम कराने के बाद शव घरवालों को सौंप दिया गया।
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पुलिस वालों पर एक लाख रुपये मांगने का आरोप

युवक की मौत के बाद रोते परिजन - फोटो : Amar Ujala
मृतक के पिता शमशेर सिंह के मुताबिक रिंकू गजनसू में किराना स्टोर चलाता था। 13 दिसंबर को पुलिस ने उसे पकड़ा। उस पर शराब की फ्रूटियां रखने का आरोप था। पुलिस वालों ने उसे छोड़ने के लिए एक लाख रुपये की मांग की। बाद में वे 30 हजार पर मान गए। 22 हजार रुपये दे भी दिए गए।

शमशेर ने बताया कि पुलिस ने हिरासत में रिंकू को रजाई या कंबल भी नहीं दिया था। पिता का आरोप है कि पुलिस द्वारा रिंकू को हिरासत में लेने का मकसद ही पैसे ऐंठना था। 15 दिसंबर को रिंकू की कोर्ट से जमानत करवाई गई। वीरवार दोपहर चार बजे रिंकू को रिहा किया गया। तब उसकी हालत बहुत खराब थी। वे रिंकू को लेकर जीएमसी गए, लेकिन, रिंकू को बचाया नहीं जा सका।

आरोप है कि जब तक पैसे का लेन-देन नहीं हुआ तक तक पुलिस ने रिंकू की जमानत नहीं होने दी। जबकि कानून की जिस धारा 48 (ए) के अंतर्गत रिंकू को हिरासत में लिया गया था, उसके अंतर्गत जांच अधिकारी या फिर थाना अधिकारी, नायब तहसीलदार भी जमानत ले सकता है। लेकिन, पुलिस वाले जानबूझ कर मृतक के परिजनों को अदालत के चक्कर कटवाते रहे।

मढ़ से विधायक चौधरी सुखनंदन कुमार भी पुलिस चौकी और अस्पताल पहुंचे। उन्होंने घरवालों को सांत्वना देने के अलावा दोषी पुलिस कर्मियों को सख्त सजा देने की मांग की। जांच अधिकारी बनाए गए एसपी ग्रामीण अरुण गुप्ता ने कहा कि गवाहों के बयानों के आधार पर ही जांच आगे बढ़ाई जाएगी।

पुलिस पर पैसे मांगने के आरोप पर उन्होंने इसे मैटर आफ इंक्वायरी बताया। चोट के निशान पर कहा कि पोस्टमार्टम की प्राथमिक रिपोर्ट में डाक्टरों ने किसी भी तरह की चोट नहीं होने की बात कही है।
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