रमजान के पवित्र माह में खजूर की मांग बढ़ जाती है। लिहाजा इस रमजान माह में पंद्रह करोड़ के खजूर की खपत होती है। घाटी के बाजारों में रमजान की शुरूआत के साथ ही बाजारों में काफी रौनक हो जाती है। जगह -जगह विभिन्न प्रकार की वस्तुएं बिकती नजर आती हैं। वहीं, खजूर इस पवित्र माह में खास महत्व रखते हैं। रमजान का महीना जैसे आता है तो सबसे ज्यादा मांग रहती है।
इसलाम धर्म में रोजा खोलने के लिए खजूर से बेहतर कोई भी चीज नहीं समझी जाती। अधिकतर लोग खजूर से ही इफ्तियारी करते हैं क्योंकि इसे मुस्लिम समुदाय के लोगों द्वारा सुन्नाह (पैगंबर द्वारा अपनाया गया तरीका) माना जाता है। इस्लाम धर्म के अनुसार खजूर से रोजा खोलने पर पुण्य मिलता है।
इस पवित्र महीने के दौरान विश्व के विभिन्न देशों से घाटी में खजूरों की करीब 30 विभिन्न किस्में देखने को मिलती हैं और प्रतिदिन इन खजूरों की बिक्री हजारों रुपये में होती है। लेकिन सबसे ज्यादा सऊदी अरब और पाकिस्तान के खजूर कश्मीरी बाजारों पर कब्जा करते हैं।
स्थानीय व्यापारियों के अनुसार रमजान के पवित्र महीने के दौरान करीब 15 करोड़ से अधिक की खजूरों की बिक्त्री होती है और ज्यादा खजूर मध्य पूर्व देशों और पाकिस्तान से यहां आता है। मध्य पूर्व से आने वाले खजूर मुंबई पोर्ट के रास्ते आयात किए जाते हैं जबकि पाकिस्तानी खजूर मुज्जफराबाद मार्ग से श्रीनगर पहुंचते हैं।
ऑल कश्मीर फ्रूट ग्रोवर्स एंड डीलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष बशीर अहमद ने बताया कि रमजान के महीने के दौरान 12 करोड़ से अधिक के खजूरों का आयात किया जाता है। उन्होंने यह भी बताया कि घाटी में लोग ज्यादातर मध्य पूर्व से आयात किए गए खजूरों का सेवन करते हैं क्योंकि उनकी क्वालिटी सबसे अच्छी होती है। इनकी कीमत 800 से लेकर 2000 रुपये प्रति किलो होती है।