जम्मू कश्मीर हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में स्थानीय निकाय निदेशालय के डेलीवेजर को उसकी मौत के 11 साल बाद नियमित करने समेत परिवार को पेंशन लाभ देने का आदेश जारी किया है। चीफ जस्टिस एनपाल वसंथाकुमार ने अपने आदेश में कहा, याची के पति ने 23 अगस्त, 1989 में सेवा शुरू की थी, जिसकी 24 नवंबर 2005 को मौत हो गई थी।
डेलीवेजर मुलाजिम को नियमित करने के लिए सात वर्ष का कार्यकाल निर्धारित किया गया है। इस लिहाज से याची के पति ने नियमित होने के लिए डेलीवेजर की अवधि को 23 अगस्त, 1996 में पूरा कर लिया। ऐसे में उसे वर्ष 1996 से ही स्थायी मुलाजिम का वेतनमान और अन्य लाभ दिए जाएं।
कोर्ट ने कहा, याची को रेगुलेशन 177 आफ फेमिली पेंशन और ग्रेज्यूटी रूल्स के तहत 25 नवंबर, 2005 से पेंशन का लाभ दिया जाए। याची की अपनी सेवा को एक अक्तूबर 2014 के बजाय 09 जनवरी 2006 से नियमित किया जाए। कोर्ट ने एडवोकेट धीरज पठानिया की दलीलें सुनने के बाद स्थानीय निकाय निदेशक को आदेश जारी करते हुए कहा, अधिकारी को आदेश पर अमल सुनिश्चित कर छह सप्ताह में रिपोर्ट सौंपनी होगी। फैमिली पेंशन समेत अन्य प्रस्तावाें के लिए चार सप्ताह के भीतर पांचवें पक्ष को निर्देशित किया जाएगा। बकाया राशि भुगतान के लिए छह सप्ताह की मोहलत दी जाएगी।