स्थायी होने और लंबित वेतन जारी करने की मांग को लेकर जलशक्ति विभाग के अस्थाई कर्मचारियों ने जम्मू शहर स्थित संभागीय आयुक्त के कार्यालय का घेराव किया। गुरुवार को बड़ी संख्या में अस्थाई कर्मचारी एकत्रित हुए और मांगों को लेकर नारेबाजी करते हुए रोष जताया।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे दौ सौ से अधिक दिनों से धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं। 90 महीनों का वेतन जारी नहीं किया जा रहा है। इसकी वजह से कर्मी आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं। अक्तूबर महीने में उच्च अधिकारियों की तरफ से कमेटी गठित कर समस्याओं को हल करने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया।
कर्मचारियों का कहना है कि जलशक्ति विभाग के अस्थायी कर्मियों ने कहा कि 30 सालों से झूठे आश्वासन देकर इस्तेमाल किया जा रहा है। किसी भी सरकार, राज्यपाल और उप राज्यपाल शासन ने सुध नहीं ली है। लेकिन इस बार कर्मचारी हक के लिए आरपार की लड़ाई के लिए मैदान में उतरे हैं। उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में कर्मियों को छह से सात हजार रुपये प्रतिमाह मेहनताना दिया जा रहा है, जो महंगाई के दौर में नाकाफी है। एलजी प्रशासन की ओर से मांगों को पूरी तरह से नजरअंदाज किया जा रहा है, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
एक प्रदर्शनकारी ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में उनके 22 हजार साथी अपने हक की लड़ाई लड़ रहे हैं। महंगाई के दौर में मिल रहे मानदेय से घर का खर्च चलाना मुश्किल हो गया है। सरकार दो दशक की सेवा पूरी कर चुके अस्थायी कर्मचारियों को भी नियमित नहीं कर रही है। उन्होंने विभाग से पांच साल के बकाया मानदेय को देने की मांग की।
वहीं, प्रदर्शनकारियों में शामिल एक अन्य कर्मचारी ने कहा कि सरकार अभी उनके मसलों को हल करने के बजाए उन्हें कमेटियां गठित कर भ्रमित करने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि पिछले 20 सालों से वह लोग अपनी सेवा विभाग को दे रहे हैं। जिसका सारा रिकार्ड विभाग के पास उपलब्ध है ऐसे में सरकार कमेटियों को बैठाकर एक बार फिर अस्थायी कर्मचारियों को बरगलाने का प्रयास कर रही है, जिसे वह बर्दाश्त नहीं करेंगे।
ये हैं अस्थायी कर्मियों की मांगें
1. समय अवधि पूरी कर चुके अस्थायी कर्मियों को नियमित करना
2. न्यूनतम वेतन प्रतिदिन 618 रुपये तय करना
3. 90 माह का लंबित वेतन जारी करना