इस तरह होती है ठगी
एक भरोसेमंद कांटेक्ट से हाय! यह फोटो देखें... जैसे मैसेज आते हैं। मैसेज का लिंक नकली फेसबुक व्यूअर पर ले जाता है। कंटेंट देखने के लिए ओटीपी के जरिए वेरिफाई करने को कहा जाता है। जालसाज फोन नंबर के जरिए डिवाइस लिंक के फीचर का लाभ उठाते हुए एक कोड भेजते हैं। लोगों को कोई नुकसान नजर नहीं आता लेकिन असल में कोड पेयर करते ही बिना पासवर्ड चोरी या सिम स्वैप के उनके खाते पर ठग का एक्सेस हो जाता है। ठीक व्हाट्सएप वेब की तरह। अब वे आराम से आपके मैसेज को पढ़ सकते हैं, जो उनके डिवाइस पर लिंक होते है। वे फोटो, वीडियो और वॉयस नोट्स देख सकते हैं। इतना ही नहीं, आपके कॉन्टैक्ट्स और ग्रुप में मैसेज कर सकते हैं। कई बार वे आपके सोशल अकाउंट से आपत्तिजनक फोटो दूसरे लोगो को भेजते हैं, जिससे यूजर की बदनामी होती है।
जम्मू में कुछ समय पहले ऐसे कई मामले आ रहे थे। साइबर जागरूकता को लेकर उठाए गए कदमों से मामलों में कमी आई है। किसी को कोई शिकायत है तो हेल्पलाइन नंबर पर संपर्क कर सकता है। -कामेश्वर पुरी, एसपी साइबर क्राइम, जम्मू।