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बाबा सिद्ध गोरिया नाथ ने ली थी जल समाधि

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श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बाबा सिद्ध गोरिया नाथ जी का पवित्र मठ
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रामगढ़। जम्मू-कश्मीर के प्रमुख पवित्र स्थानों में रामगढ़ के गांव स्वांखा स्थित मन की मुरादें पूरी करने वाले ऐतिहासिक धार्मिक स्थल बाबा सिद्ध गोरिया नाथ के मठ के प्रति लोगों में गहरी आस्था है। हर वर्ष अषाढ़ के शुक्ल पक्ष के पूर्णिमा के पहले रविवार को यहां भव्य मेला लगता है।
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ऐसी मान्यता है कि इस मठ में स्थित पवित्र सरोवर में स्नान कर बाबा जी की समाधि पर माथा टेकने से कई प्रकार के चर्म रोगों से मुक्ति मिलती है, व मुरादें पूरी होती हैं। बाबा सिद्ध गोरिया नाथ मठ जम्मू से 35 किलोमीटर दूर रामगढ़ के गांव स्वांखा में स्थित है। 900 साल पुराने ऐतिहासिक स्थल के प्रति लोगों में श्रद्धा है। देश के अन्य राज्यों से श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। कहा जाता है कि 12 वीं सदी के शुरू में उत्तर भारत के लोग भूत-प्रेत भ्रमों व निर्मल धारणाओं का शिकार हो गए थे। उससे पहले की गुमराह जनता को पाखंडी लोग मनमाने ढंग से लूटते, नाथ पंथ गुरु गोरखनाथ के मार्गदर्शन में हर कहीं फैलने लगा।
संप्रदाय के पवित्र अनुशासित सदस्यों ने लोगों की आशंकाएं व भ्रम दूर किए। उन्होंने कच्चे धागे और धुनी की पवित्र विभूति से भ्रमित लोगों को नई राह सुझाई, और लोग उनके अनन्य भक्त बन गए। अधर्म से धर्म के की ओर आने लगे। संप्रदाय के योगियों और महंतों ने चरित्र निर्माण करने वाले भरे पूरे मठों की स्थापना की, और उन्हीं में से एक त्याग और भक्ति की दिव्य गाथा बाबा सिद्ध गोरिया मठ है। जिसने हमेशा भाईचारे, सादगी, मानव प्रेम, मानव सेवा, गुरु भक्ति की प्रेरणा दी, और लोग इस स्थल के प्रति गहरी आस्था है और रखते भी हैं। स्वांखा स्थित पवित्र सरोवर में गुरु गोरखनाथ के शिष्य बाबा सिद्ध गोरिया नाथ ने जीवित जल समाधि ली थी। माता मथुरा बाबा दित्तो और उनके छोटे बेटे बालकू की इच्छा अनुसार उनके सिर पर हाथ रखा और तीनों समा गए।
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मठ पर स्थित यह वही स्थान है, जो माता मथुरा वाले मंदिर के नाम से जाना जाता है। बाबा सिद्ध गोरिया के पवित्र सरोवर के मध्य में बाबा जी की समाधि है। श्रद्धालु सुंदर समाधि की ओर मुंह करके सरोवर में स्नान करते हैं, और चमत्कारी जल अपने साथ ले जाते हैं। मान्यता के अनुसार हर संकट में उस पावन जल का प्रयोग संकटमोचन बन जाता है। मठ के वर्तमान महंत पीर भोला नाथ जी हैं, जिनकी देखरेख में देव स्थल का अभूतपूर्व विकास हुआ है, और देवस्थान विकास की ओर अग्रसर है।
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