राजोरी। राजोरी के श्री ज्ञान गंगा आश्रम में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में महामंडलेश्वर श्री श्री 1008 विश्वात्मानंद सरस्वती ने कथा व प्रवचनों से संगत को निहाल किया। इससे पहले कलश यात्रा निकाली गई।
उन्होंने राजा परीक्षित को श्राप का वर्णन, सुखदेवजी का आगमन, ब्रह्माजी की उत्पत्ति का वर्णन, भगवान की लीलाओं का वर्णन और राजा परीक्षित को श्राप से मुक्त करने के लिए सुखदेवजी की ओर से उपाय का वर्णन किया।
भागवत कथा सुनने के लिए काफी श्रद्धालु उमड़े। विश्वात्मानंद सरस्वती ने बताया कि कलयुग में मनुष्य अपने सांसारिक कार्य में इस कदर व्यस्त हो गया है कि न तो उसे सुख मिल रहा है और न ही मानसिक आराम।
वहीं इससे पहले राजोेरी शहर के ज्ञान गंगा आश्रम में पांच जून को आयोजित होने वाले गंगा दशहरा उत्सव को चिह्नित करने के लिए कलश यात्रा निकाली गई। इसमें सुंदरबनी, नौशेरा, कालाकोट, ढांगरी, उधमपुर, कठुआ और जम्मू के अलावा कुछ अन्य स्थानों से श्रद्धालु शामिल थे। पूरे यात्रा मार्ग के दौरान भक्तों ने ढोल की थाप के साथ नृत्य किए और भगवान कृष्ण के भजन गाए।