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कबीर के निर्वाण दिवस को अंतर्ध्यान दिवस कहना उचित

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साहिब मधु परमहंस जानकारी देते
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विजयपुर। साहिब बंदगी आश्रम रांजड़ी के संचालक सद्गुरु साहिब मधु परमहंस ने कहा कि वह संत शिरोमणि सद्गुरु कबीर साहिब के निर्वाण दिवस को कबीर अंतर्ध्यान दिवस कहना अधिक उचित है। क्योंकि इस नश्वर संसार की किसी भी शक्ति के लिए वे बाध्य नहीं थे। इसलिए उनके लिए निर्वाण शब्द का तो कोई प्रश्न ही नहीं उठता।
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वह बुधवार को आश्रम में प्रेसवार्ता में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि कबीर साहिब ने इन दोनों भक्तियों से आगे सद्गुरु भक्ति का रहस्य इस संसार को दिया। केवल सद्गुरुभक्ति द्वारा ही जीव पूर्ण मोक्ष की प्राप्ति कर सकता है। इस महान दिन का इतिहास बताते हुए मधु परमहंस ने कहा कि कबीर साहिब ने सन 1518 ई. में माघ शुक्ल एकादशी के दिन मगहर, उत्तर प्रदेश में अपना शरीर छोड़ा। वे काशी को छोड़ मगहर में इसलिए शरीर त्यागने आए क्योंकि उस समय लोगों में एक भ्रांति प्रचलित थी। उन्होंने लाखों लोगों के सामने इस काम को अंजाम दिया। कबीर साहिब ने लाखों लोगों के समक्ष यह कार्य इसलिए किया क्योंकि वह प्रमाणित करना चाहते थे कि वह कभी मातृ गर्भ से नहीं आए। उन्होंने समानता और सामाजिक सद्भाव का संदेश संसार को दिया। उनकी शिक्षाएं किसी विशेष जाति या समुदाय के लिए नहीं, बल्कि समूची मानवता के लिए है। वे निश्चय ही पूरी मानवता के मसीहा थे।
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