बावे वाली माता का दरबार लिली, रजनीगंधा, ट्यूलिप, गुलाब और गेंदा के फूलों से सजाया जाएगा। इसके लिए बंगलूरू से डेढ़ लाख रुपये खर्च कर फूलों को मंगवाया गया है।
पावन नवरात्र में इस बार नौ दिनों तक बावे वाली माता का दरबार लिली, रजनीगंधा, ट्यूलिप, गुलाब और गेंदा के फूलों से सजाया जाएगा। इसके लिए बंगलूरू से डेढ़ लाख रुपये खर्च कर फूलों को मंगवाया गया है। 26 सितंबर से शुरू हो रहे नवरात्र के दौरान बावे वाली माता के दरबार को भव्य बनाने के लिए मंदिर प्रबंधन अनोखा श्रृंगार करवा रहा है।
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मंदिर में रंग-रोगन, फूल, रंगी-बिरंगी लाइट, चुनरी लगाने के काम को शनिवार देर शाम तक अंतिम रूप दे दिया गया। इस बार अमृतसर से मंगवाई गई रंग-बिरंगी लाइट विशेष आकर्षण का केंद्र बनेगी। मंदिर प्रबंधक कमेटी के सदस्य शिल्पा मगोत्रा ने कहा कि सभी विभाग से समन्वय कर सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। मंदिर में महिला व पुरुष भक्तों के लिए अलग-अलग लाइन की व्यवस्था रहेगी। वहीं मंदिर परिसर में प्रतिदिन भंडारा लगाया जाएगा। इसमें व्रत रखने वालों के लिए फलाहार की व्यवस्था होगी। सोमवार को प्रथम नवरात्र से प्रतिदिन सुबह और शाम विशेष पूजा-अर्चना और आरती होगी।
प्रतिदिन सुबह चार बजे खुलेगा मां बावे का दरबार
नवरात्र में प्रतिदिन बावे वाली माता का दरबार सुबह चार बजे खुलेगा और रात दस बजे बंद होगा। साफ-सफाई और भोग लगाने के लिए प्रतिदिन दोपहर दो से तीन बजे तक मंदिर एक घंटे के लिए बंद रहेगा। मंदिर प्रबंधन कमेटी के सदस्यों ने कहा कि सभी तैयारियां को पूरा कर लिया गया है।
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पक्का डंगा : मां चंडी मंदिर में कल जलाई जाएगी अखंड ज्योति
पक्का डंगा स्थित मां चंडी मंदिर में भी तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। मंदिर को देसी-विदेशी फूलों से सजाया गया है। सोमवार को पहले दिन मंदिर में अखंड ज्योति जलाई जाएगी। आठवें नवरात्र पर कंजक पूजन के साथ अखंड ज्योति को प्रवाहित किया जाएगा। मंदिर में नौ दिन दोपहर तीन से शाम सात बजे तक सत्संग होगा। मंदिर के कपाट सुबह 4:30 बजे खुलेंगे। इसके बाद विशेष पूजा होगी। शाम में विशेष पूजा-अर्चना के बाद मंदिर दस बजे बंद होगा। मंदिर प्रबंधक कमेटी ने सदस्यों ने कहा कि प्रथम नवरात्र से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है।
महामाया मंदिर में उमड़ेगा आस्था का सैलाब
महामाया मंदिर में नवरात्र पर आस्था का सैलाब उमड़ेगा। मां बावे वाली का दर्शन करने वाले श्रद्धालु महामाया के दरबार में हाजिरी लगाने पहुंचते हैं। इससे इन दोनों मंदिरों में नौ दिनों तक मेले जैसा माहौल रहता है। बावे से महामाया तक रोपवे सुविधा शुरू होने के बाद से भक्तों की राह ज्यादा सुगम हो गई है। यहां मंदिर के कपाट सुबह चार बजे खुलेंगे।