अखनूर। गांव नरडी टाचढवां में चल रही श्रीमद्भागवत कथा शनिवार को संपन्न हो गई। कथा वाचक
संत सुभाष शास्त्री ने कहा कि समाज में अराजकता व्याप्त है। कोई भी मनुष्य नियमित जीवन नहीं जी रहा। असल बात यह है कि जीवन जीना भी एक कला है। मानव और इस कला को हमारे माता-पिता तथा संत व शास्त्र बताते हैं। इसे हम धर्मानुसार जीवन जीना भी कह सकते हैं । इसके द्वारा सुरखी जीवन जी सकते हैं।
कथा वाचक ने आगे कहा कि मनुष्य को अपने धर्म का पालन करना चाहिए। क्योंकि जो धर्म को त्यागता है, धर्म उसे त्याग देता है। इस संसार में जो धर्म का पालन करता है और ईश्वर के आश्रित होकर अपने कर्तव्यों का पालन करता है, ईश्वर उसका पालन करता है। कथा वाचक ने समझाया कि दुष्ट व्यक्ति का संग अच्छा नहीं होता। दुष्ट व्यक्ति और सांप इन दोनों में आप सांप को अच्छा मानें, सांप तो कालवर एक ही बार काटता है, लेकिन दृष्ट व्यक्ति तो बार-बार आपको हानि पहुंचाता है। जिस प्रकार कोयला न जले तो हाथ काला कर देता है, और जले तो उसे जला देगा। ठीक इसी प्रकार दृष्ट व्यक्ति किसी न किसी प्रकार की हानि अवश्य पहुंचाता है।
शिव शनि मंदिर राया मोड़ में श्रीमद्भागवत कथा आज से
विजयपुर। शिव शनि मंदिर राया मोड़ में रविवार को श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन किया जा रहा है। इसकी जानकारी स्थानीय लोगों ने दी। उन्होंने बताया कि विश्व शांति के लिए कथा का आयोजन किया जा रहा है। इसमें कथावाचक जनक शास्त्री प्रवचन करेंगे। उन्होंने लोगों से अनुरोध किया है कि कथा में बढ़-चढ़कर भाग लें और पुण्य का भागी बनें। संवाद