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कश्मीर में आतंकियों की भर्ती में हुआ भारी इजाफा, 200 से अधिक आतंकी अब भी सक्रियः सीआरपीएफ

Fri, 24 Aug 2018 08:59 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
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सीआरपीएफ के डीजी आरआर भटनागर ने जम्मू में की प्रेस वार्ता - फोटो : अमर उजाला
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सीआरपीएफ के डीजी आरआर भटनागर ने कहा है कि कश्मीर घाटी में अब भी 200 से अधिक आतंकी सक्रिय हैं। स्थानीय आतंकियों की भर्ती भी हो रही है। हम इससे प्रभावी ढंग से निपटेंगे। नंबर बढ़ता-घटता रहता है। स्थानीय और विदेशी आतंकियों की अदला-बदली होती रहती है।
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पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि कश्मीर के स्थानीय युवाओं को आतंकवाद में शामिल होने से रोकने के लिए राज्य सरकार और सीआरपीएफ के अलावा अन्य सुरक्षा एजेंसियां कई कार्यक्रम चला रही हैं। युवाओं को आतंकवाद का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लाने की कोशिश होती है। कई सिविक एक्शन प्रोग्राम चल रहे हैं। युवाओं को शिक्षा, खेल, रोजगार से जोड़ने की कोशिश की जा रही है। कश्मीर के बच्चों को भारत दर्शन के लिए लेकर जाते हैं। हमारा प्रयास है कि भटके हुए युवाओं को मुख्यधारा में लाया जाए। उनकी विचारधारा बदलने के लिए काम हो रहा है। 
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हमले जवानों का मनोबल नहीं तोड़ सकते

कश्मीर में सुरक्षा कर्मियों को अगवा करने और छुट्टी पर आने के बाद हत्या कर देने के सवाल पर डीजी ने कहा कि कश्मीर में सुरक्षाबलों पर होने वाले हमलों से आतंकी दहशत पैदा करना चाहते हैं। इसलिए कायराना हरकतें करते हैं। लेकिन इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। ऐसे हमले जवानों का मनोबल नहीं तोड़ सकते। आतंकियों के हर हमले के लिए हम तैयार हैं। तैयारी का ही नतीजा है कि पिछले दो साल से आतंकी कोई बड़ा फिदायीन हमला नहीं कर पाए।  

अब एक करोड़ का मुआवजा
डीजी ने बताया कि सीआरपीएफ अपने जवानों को लेकर हमेशा आगे बढ़कर काम करती है। इसलिए अब अगर कोई जवान शहीद हो जाता है तो उसके परिवार को एक करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जा रहा है। पिछले दो साल से ऐसा चल रहा है। परिवारों के लगातार संपर्क में भी रहा जाता है ताकि उनके मामलों को सुलझाया जाए। 

सीआरपीएफ अपने केंद्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करेगी
जम्मू कश्मीर में सीआरपीएफ के लगभग 800 सेंटर है। सिर्फ कश्मीर में ही 450 हैं। बहुत से सेंटर आबादी के बीच हैं। हर जगह तो संभव नहीं कि सेंटरों के पास बसे लोगों को हटा दिया जाए। बावजूद इसके अपने सेंटरों की सुरक्षा को लेकर हमने कई तरह के कदम उठाए हैं। सभी एजेंसियों के साथ मिलकर हम काम कर रहे हैं। 

एफआईआर से कोई डर नहीं
जवानों के खिलाफ लगाई जाने वाली एफआईआर पर डीजी ने बोला कि इसका कोई डर नहीं। जब हमें मालूम होता है कि हम सही हैं तो एफआईआर से कोई फर्क नहीं पड़ता। पुलिस को एफआईआर लगाना होता है, क्योंकि एक कानूनी दायरा है। लेकिन अगर हम सही हैं, तो एफआईआर से कोई डर नहीं। हम इससे निपट लेते हैं। 
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